1 अप्रैल से टोल टैक्स महंगा, दून में फिर उठी इस टोल प्लाजा को हटाने की मांग


Last Updated:

Dehradun News: डोईवाला की रहने वालीं शैला ममगईं ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि हमें हर जरूरी काम के लिए देहरादून जाना पड़ता है. हमारे बच्चे स्कूल-कॉलेज और नौकरी करने के लिए शहर जाते हैं. हमें टोल प्लाजा से होकर…और पढ़ें

X

लच्छीवाला टोल प्लाजा पर हाल ही में एक्सीडेंट हुआ था.

देहरादून. नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) हर साल टोल टैक्स में बढ़ोतरी करता है. 1 अप्रैल से टोल टैक्स में इजाफा कर दिया जाएगा, जिसकी दरें निर्धारित कर दी गई हैं. टोल टैक्स में 5 रुपये से लेकर 30 रुपये तक बढ़ोतरी की गई है. इसके तहत कार-जीप, छोटा हाथी का एक तरफ का टोल टैक्स 105 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये कर दिया गया है. वहीं भारी वाहनों के लिए भी टोल टैक्स बढ़ाया गया है. उत्तराखंड के देहरादून में 1 अप्रैल से टोल टैक्स बढ़ने से रोडवेज बसों में सफर कर गढ़वाल के कई जिलों में जाने वाले बस यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ेगा. वहीं लच्छीवाला टोल प्लाजा के करीब 20 किमी के दायरे में रह रहे लोगों के प्राइवेट वाहनों के लिए भी मासिक पास में भी हर साल की तरह 10 रुपये बढ़ाकर इसे 350 रुपये किया जाएगा. स्थानीय लोग लंबे समय से इस टोल प्लाजा को हटाने की मांग कर रहे हैं. स्थानीय लोग और समाजसेवक आंदोलन कर रहे हैं. 30 मार्च को भी राष्ट्रीय रीजनल पार्टी के कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों और स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया.

डोईवाला क्षेत्र की रहने वालीं शैला ममगईं ने लोकल 18 से कहा कि हमें हर जरूरी काम के लिए देहरादून शहर जाना पड़ता है. हमारे बच्चे स्कूल, कॉलेज और नौकरी करने के लिए शहर में जाते हैं. हमको टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ता है. जब यह टोल प्लाजा बना था, तब स्थानीय लोगों के लिए फ्री पास बनवाया गया था जबकि जून 2024 के बाद से हमें मासिक पास बनवाना पड़ रहा है. वहीं हम लोगों ने जो नई गाड़ियां ली हैं, उसका भी शुल्क देना पड़ रहा है. उनका कहना है कि दूसरे राज्यों में हम जाएं, तो टोल का समझ आता है लेकिन हमें अपने ही क्षेत्र में टोल देना पड़ रहा है. अपने ही क्षेत्र में हमें अगर टोल देना पड़े, तो यह कितनी गलत बात है. वहीं आए दिन यहां आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. हमें अपने बच्चों की फिक्र सताती रहती है.

‘हमारे लिए टोल टैक्स नहीं होना चाहिए’
स्थानीय निवासी दयाराम का कहना है कि हमारे लिए यानी डोईवाला क्षेत्र के लोगों के लिए टोल टैक्स नहीं होना चाहिए. हम तो सिर्फ 6 किलोमीटर की रोड का इस्तेमाल करते हैं जबकि 36-37 किमी के हाईवे मार्ग का प्रयोग करने पर टैक्स देना चाहिए. हम किसान हैं, हमें अपने खेतों में बीज, खाद और कृषि उपकरण लाने-ले जाने पड़ते हैं, जिनमें चौपहिया गाड़ियों का उपयोग करना पड़ता है. ऐसे में हमें टोल टैक्स देना पड़ता है. ऐसे ही स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों को टोल टैक्स देना पड़ता है.

दुर्घटना के बाद सेफ्टी ऑडिट का काम
राष्ट्रीय रीजनल पार्टी के अध्यक्ष और समाजसेवी शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि हम इस टोल प्लाजा के विरोध में शुरुआत से ही हैं. स्थानीय लोग और हम मिलकर स्थानीय लोगों को टोल टैक्स मुक्त करने और इस टोल को यहां से शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीते दिनों लच्छीवाला टोल प्लाजा में हुए भीषण हादसे ने सबको डरा दिया है. हादसा हो जाने के बाद अब अधिकारी वहां पहुंचते हैं और सरकार अब सेफ्टी ऑडिट कराने की बात करती है. सेफ्टी ऑडिट पहले कराया जाता, तो यहां टोल प्लाजा नहीं बनता. यह राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र में आता है, जो पहले एलीफेंट कॉरिडोर के रूप में नोटिफाई था. इसे सरकार द्वारा डिनोटिफाई किया गया. इसके खिलाफ हम उग्र आंदोलन करेंगे और कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे.

homeuttarakhand

1 अप्रैल से टोल टैक्स महंगा, दून में फिर उठी इस टोल प्लाजा को हटाने की मांग

By