Gauchar History: अहिल्याबाई ने गायों के लिए दान दी थी ज़मीन, शहर का नाम पड़ गया गौचर


रिपोर्ट: सोनिया मिश्रा

चमोली: उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित गौचर एक छोटा शहर है. यह अलकनंदा नदी के बाईं ओर स्थित है और बद्रीनाथ धाम यात्रा का भी यह एक पड़ाव है. 2019 में गौचर को बेस्ट गंगा टाउन का अवार्ड भी मिल चुका है. यह शहर समुद्र तल से 2,620 फीट की ऊंचाई पर है. सात पहाड़ियों के बीच घिरा गौचर शहर अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपने समतल क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है, क्योंकि चमोली का यह एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो पूरी समतल भूमि पर बना है. इसलिए लोगों के लिए देहरादून के बाद दूसरी पसंद गौचर बनता है. साल 2013 में केदारनाथ त्रासदी के दौरान गौचर स्थित हवाई पट्टी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आगे जानते हैं गौचर शहर का इतिहास.

स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह बिष्ट बताते हैं कि गौचर का अर्थ है गायों के चरने का स्थान. कहते हैं कि इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर जब बद्रीनाथ धाम यात्रा पर जा रही थीं तब उन्होंने गायों की दुर्दशा देखी. ये देखने के बाद उन्होंने गौचर के खेल मैदान को गायों के लिए दान कर दिया था. तब से यह पूरी भूमि गौचर के नाम से जानी जाने लगी. महेंद्र ने बताया कि इस बात का कोई लिखित प्रमाण नहीं है, हमारे पूर्वजों ने हमें यह बातें बताई थीं.

गौचर की स्थिति

गौचर एक नगर पालिका क्षेत्र है, जिसमें 7 वार्ड मौजूद हैं. गौचर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), पॉलिटेक्निक, इंटर कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और 9 प्राइवेट स्कूल हैं. इसके साथ-साथ गौचर में हवाई सेवाएं भी वर्तमान समय में संचालित होती हैं.

1943 से संचालित होता है गौचर मेला

1943 से राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का आयोजन गौचर मेला मैदान में किया जाता है. मेले में मुख्यतया तिब्बती ऊन, बकरियां, तिब्बती कालीन, दन, हींग, तिब्बती नमक, कस्तूरा, भोटिया चाय का व्यापार होता था. इस वर्ष 70वें गौचर मेले का भव्य आयोजन किया गया था. एक सप्ताह तक चलने वाला यह मेला गौचर खूबसूरती और अधिक बढ़ा देता है.

ऐसे पहुंचे गौचर

सड़क मार्ग: चमोली में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 (बद्रीनाथ राजमार्ग) पर गौचर शहर स्थित है.
हवाई मार्ग: देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट से गौचर हवाई पट्टी तक पहुंचा जा सकता है.
ट्रेन: नजदीक रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और देहरादून है. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर कार्य चल रहा है. आने वाले समय में कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग से होते हुए यहां पहुंचा जा सकेगा.

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