Himachal Pradesh Truck Driver Poonam Negi: ‘किन्नौर में जहां रहती हूं वहां पर ही भूस्खलन होता रहता है.. इसलिए ऊबड़-खाबड़ सड़क पर ट्रक दौड़ाते हुए भूस्खलन देखकर डर नहीं लगता कभी… ‘ मैं सोच रही थी कि सुरीली आवाज और मासूम चेहरे वाली यह लड़की पहाड़ के किसी पत्थर से बनी है! जरूर यह पत्थर ऊपर से मजबूत मगर भीतर से संवदेनशील रहा होगा, जिसने पूनम नेगी में कड़ा जिगरा, साहस और कोमल मन रोप दिया…
‘हर समय तो स्लाइडिंग का खतरा बना रहता है कच्चे रोड होते हैं कभी भी ऊपर से पत्थर गिर सकते हैं या पैरों के नीचे की जमीन खिसक सकती है..’ यह कहते हुए आवाज में कहीं भी थरथराहट नहीं थी.. पूनम नेगी हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में रहती हैं.. दशक से अधिक समय से ट्रक व अन्य भारी वाहन चला रही हैं. ‘लोग जब औरत होने के कारण टांग खिंचाई करते हैं.. चाहे ट्रक चलाने के मामले या फिर टैक्सी चलाते समय, कई बार कुछ ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जो औरत होने के चलते झेलनी पड़ती हैं.. तब मन करता है छोड़ दो ये काम.. बड़ी नेगेटिविटी आती है…’ जिस लड़की को पहाड़ के पत्थर और मौत का खौफ नहीं तोड़ सकता, वहां सेम-फील्ड के लोग उन्हें हतोत्साहित करने लगते हैं…
पूनम नेगी
शिमला से किन्नौर का हाई वे सबसे ज्यादा खतरनाक हाई वे में से एक माना जाता है और इस रोड से वह एक से अधिक बार गुजर चुकी हैं… शिमला से चंबा की सुदूर पांगी घाटी तक का जोखिम भरा सफर तय कर चुकी हैं पूनम.. यही वजह रही होगी कि उन्हें दर्जनों अवॉर्ड मिल चुके हैं, कई जगहों पर चर्चाओं के लिए बुलाया जाता है.. वह इन प्लेटफॉर्म के जरिए जनहित में भी आवाज उठा रही हैं..
‘लड़कियों का काम नहीं है ये.. ये सब क्या कर रही हो…’ लोग ट्रक चलाते देखते तो चौंक जाते.. कहते- घर बार ही संभाल लेती ये क्या करने लग गई… ट्रक तो आदमी चलाते हैं… मगर घर के सपोर्ट ने संभाले रखा.. कहती हैं पूनम, लोगों की चार बातें तो चलती रहीं.. मगर हम रुके नहीं जो करना था करते रहे.. जब छोटी थी तब चाचा के साथ बैठकर ट्रक में यहां से वहां जाना होता.. बस तब से हो गया कि मुझे भी चलाना है ट्रक और इन्हीं टेढ़ी मेढ़ी खतरनाक सड़कों पर चलाना है.. काम नहीं है ये, ये तो मेरी हॉबी है.. चंडीगढ़ से यहां तक आना जाता रहता था चाचाजी के साथ, फिर 2011 से स्टीयरिंग ले ली…
बचपन में स्कूल आने-जाने के लिए सात- सात यानी कुल 14 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता…भारी स्कूल बैग के साथ पहाड़ी पर चढ़ना उतरना बड़ा मुश्किल होता… मैं तब सोचती थी काश मुझे गाड़ी चलानी आती…
अब तो पूनम ने टैक्सी सर्विस का बिजनस शुरू कर दिया है.. जब सेब का सीजन होता है सितंबर अक्टूबर के महीने में तब चंडीगढ़ से हिमाचल के बीच ट्रक में भरकर सेब ले जाती हैं..
पुरुष प्रधान समाज है… जब बात ड्राइविंग की आती है तो लड़कों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है.. इनसे नहीं होगा.. ड्राइव सही से नहीं कर पाएंगी.. जबकि हम तो शांत दिमाग के होते हैं.. जो भी करते हैं उसे ठंडे दिमाग से करते हैं और बखूबी निभाते हैं… लड़कों के साथ कंपटीशन सा हो जाता है.. ड्राइविंग लाइन में थोड़ा कम आंकते हैं हम लड़कियों को.. कहते हुए आवाज थोड़ी धीमी हो जाती है पूनम की.
‘आदमियों को हर बात में तवज्जो देते हैं.. ड्राइविंग स्कूल शुरू करना था.. बहुत परेशानी संघर्ष का सामना करना पड़ा… कोई जेन्ट्स होता तो ईज़ीली होता जाता है सब… हर चीज पर जोर देते हैं रूल पर भी ज्यादा सख्त हो जाते हैं, आदमियों को सपोर्ट ज्यादा मिलता है…’
One of the First female in north India having most Heavy Driving license Driving all types of vehicles.
‘कई बार ट्रेनरों के डॉक्युमेंट नियम के मुताबिक नहीं होते.. हम आवाज उठाते हैं तो हमें तो कह दिया जाता है कि रूल तो रूल है सबके लिए बराबर है.. ऐसा लगता है कि हम तो बेकार ही हैं.. हम टूट जाते हैं अंदर से जैसे कुछ गलत कर रहे हैं क्या…’
‘सड़क पर कोई मदद नहीं करता, संवेदनशील हों थोड़ा’
जब कोई कहता है कि आपसे बड़ी प्रेरणा मिल रही है.. कई लड़कियां बोलती हैं अब, तो खुशी मिलती है. भले ही बाकी कई लोग तो किसी भी फील्ड में औरतों के जाने पर पीछे खींचने की कोशिश करें. मगर लोगों का क्या है… वह तो कई बार बेहद असंवेदनशील बिहेव करते हैं. ऐसा ही एक वाकया बताते हुए बोलीं पूनम कि हिट एंड रन के एक केस में हम रुके और पुलिस को बुलाया मदद की जबकि उनके आने से पहले भी कई गाड़ियां सड़क से गुजरी होंगी. हाई वे और लॉन्ग रूट पर लोग मदद नहीं करते, थोड़ा सोचना चाहिए.. जब पूनम कहती हैं तो साफ समझ आती हैं वे जमीनी दिक्कतें जो महिला हो या पुरुष रेग्युलर ड्राइवर को झेलनी ही पड़ती हैं.
मैंने यूं ही पूनम का फेसबुक अकाउंट देखना शुरू किया.. एक पोस्ट थी-‘कुछ लोग कहते हैं नारी का कोई घर नहीं होता, अरे आप ये क्यों नहीं समझते कि उनके बिना कोई घर नहीं होता.’ स्त्री की स्थिति को शब्दों में बयान करना समाज को समझाने से बहुत ज्यादा आसान होता है. हम पूनम नेगी के हौसले को सलाम करते हैं जिनके दिल में हौसला है हिम्मत है और है कुछ न कुछ करते जाने का जज्बा, न रुकने का साहस.
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FIRST PUBLISHED : January 4, 2024, 13:08 IST
