हिमांशु जोशी
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले को बने 6 दशक से ज्यादा का समय हो गया है. 24 फरवरी 1960 को अल्मोड़ा से अलग होकर दूरस्थ क्षेत्रों और हिमालयी इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नए जिले पिथौरागढ़ का गठन हुआ था. इन 63 सालों में अगर पिथौरागढ़ के विकास की बात की जाए, तो जिला मुख्यालय में शहरीकरण काफी तेजी से बढ़ा है और अगर ग्रामीण इलाकों की बात करें, तो वहां के लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पलायन कर रहे हैं, जिसका सिलसिला लगातार जारी है.
जिला मुख्यालय में भी अभी तक स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, तो वहीं ग्रामीण इलाकों का हाल और बुरा है. सभी इलाके जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैं. शिक्षा की अगर बात करें, तो उच्च शिक्षा के लिए छात्रों के लिए पिथौरागढ़ महाविद्यालय और एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज जिले में है. बाकी आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेजों की स्थिति दयनीय ही है. कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां अभी तक सड़क ही नहीं पहुंच पाई है और ऐसे इलाकों से लगातार पलायन हो रहा है. वहीं जिले में रोजगार न मिलना भी युवाओं और परिवारों के पलायन की एक बड़ी वजह है.
पिथौरागढ़ जिले के समाजसेवी और शिक्षक अशोक पंत बताते हैं कि जिले के गठन के बाद आज 63 साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पलायन लगातार हो रहा है. पिथौरागढ़ मुख्यालय का शहरीकरण भी बेतरतीब बढ़ा है, जिससे शहर आज कई समस्याओं से गुजर रहा है.
वहीं इस बारे में जब पिथौरागढ़ के युवाओं से बात की गई, तो उनका कहना है कि जिले में शिक्षा और रोजगार के कोई साधन ना होने के कारण उन्हें अन्य राज्यों में जाना पड़ता है और जो युवा अन्य राज्यों में चले जाते हैं फिर उनका लौटना काफी मुश्किल होता है. युवा कवि ललित शौर्य ने इस विषय पर चिंता जाहिर करते हुए युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार के साधन पिथौरागढ़ में ही उपलब्ध कराने की मांग की है.
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Tags: Pithoragarh news, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : February 27, 2023, 14:39 IST
