कहने को लाडो, असल में ‘लडडू’ ही गोपाल
कोटा। कहने को लाड़ो, असल में लडडू ही गोपाल…, यह मुहावरा नहीं बल्कि समाज के दोहरे चरित्र का आईना है। बेटियों को बराबरी का हक होने का एहसास तो कराया…
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कोटा। कहने को लाड़ो, असल में लडडू ही गोपाल…, यह मुहावरा नहीं बल्कि समाज के दोहरे चरित्र का आईना है। बेटियों को बराबरी का हक होने का एहसास तो कराया…