रिपोर्ट : वेद प्रकाश
ऊधम सिंह नगर. उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में गुरुद्वारा नानकपुरी टांडा लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. यहां हर साल देश विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. मान्यता है कि जिस जगह पर गुरूद्वारे की स्थापना की गई है, उस जगह पर सिख धर्म के प्रथम गुरु नानक देव जी महाराज कुछ दिन रूके थे. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1950 में नानक पुरी टांडा क्षेत्र में पहुंचकर सिख परिवार रहने लगे और 1958 में एक छप्पर नुमा कमरे में श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी और श्री निशान साहिब को स्थापित कर गुरूद्वारे की स्थापना की गई.
भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1950 में उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर आकर बसे सिख धर्म के लोगों में 1958 को गुरूद्वारा नानकपुरी टांडा की स्थापना की. गुरूद्वारा नानकपुरी टांडा लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर दर्शन करते हैं और यहां श्रद्धालु नमक और झाड़ू दान करते हैं.
रूहेलखंड में थी गुलाम बनाने की परंपरा
‘न्यूज 18 लोकल’ से बातचीत करते हुए गुरूद्वारा नानकपुरी टांडा के कथावाचक भाई हरदीप सिंह ने बताया कि 1554 में रूहेलखंड में रूहेला पठानों की रियासत होती थी, जहां मनुष्य को पशुओं की तरह खरीदा और बेचा जाता है, फिर उन्हें जीवन भर बंधुआ मजदूर बनाकर काम कराया जाता था और उन पर अत्याचार किए जाते थे. उन्होंने बताया कि अत्याचार को रोकने के लिए गुरू नानक देव जी महाराज यहां पहुंचे और उन्हें रूहेला पठानों ने अपनी हिरासत में लेकर उनसे कठिन काम कराने लगे. इसी दौरान श्री गुरू नानक देव जी महाराज के शक्तियों को देखकर रेहला पठानों ने माफी मांगी और भविष्य में किसी को भी गुलाम ना बनाने की कसम खाई.
गुरूद्वारों से दिया जा रहा सेवा का संदेश
कथावाचक भाई हरदीप सिंह ने बताया कि श्री गुरू नानक देव जी महाराज जिस स्थान पर रुके थे. उसी स्थान पर गांव के लोगों ने एकत्र होकर 1958 में गुरूद्वारा नानकपुरी टांडा की स्थापना की और उसके बाद 1973 मे बाबा हरबंश सिंह जी व बाबा फौजा सिंह जी ने कारसेवा प्रारंभ की संगत की, जो कि आज तक बाबा हरबंश सिंह जी व बाबा फौजा सिंह जी के अकाल चलाना के बाद संत बाबा वचन सिंह जी कारसेवा दिल्ली वाले, जिनकी देश भर में सैकड़ों गुरूद्वारा में सेवा चल रही है. उन्होंने कहा कि जहां-जहां सेवा चल रही है, वहां बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल चल रहे हैं, गुरूद्वारों में लंगर चल रहे हैं, जगह -जगह पुलों का निर्माण कराया जाता है, आपदा में पीड़ित परिवारों की मदद की जाती है.
24 घंटे चलता है लंगर
कथावाचक भाई हरदीप सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा नानकपुरी टांडा लंबे समय से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. हर साल देश विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं. उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रुकने की विशेष व्यवस्था की गई है और यहां 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए लंगर भी चलता है.अगर आप गुरुद्वारा नानकपुरी टांडा जाना चाहते हो, तो आप किच्छा से 11 किमी दूर, रुद्रपुर से 18 किमी दूर, रामपुर से 39 किमी दूर, बिलासपुर से 21 किमी दूर, बरेली से 61 किमी दूर और नानकमत्ता साहिब से 52 किमी दूर पर स्थित है.
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Tags: Udham Singh Nagar News, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : April 08, 2023, 20:01 IST
