अन्तरराष्टÑीय महिला दिवस विशेष 4 :अपने से आधी उम्र वालों को पावर लिफ्टिंग में दी मात

कोटा। खेल जिसे आमतौर पर पुरूषों का क्षेत्र माना जाता है, बात फिर फुटबाल की हो क्रिकेट की हो या पावर वेटलिफ्टिंग की, खेल के हर क्षेत्र में पुरूषों का ही दबदबा माना जाता रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी कोटा की महिलाओं ने फुटबॉल और पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाकर अपनी काबिलियत और क्षमता का परचम लहराया की देखने चाले दंग रह गए। महिला दिवस पर नवज्योति की खास पेशकश में आज बात करेंगे कोटा की उन महिला खिलाड़ियों की जिन्होनें न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोटा का नाम रोशन किया बल्कि आज कई खिलाडियों को ट्रेनिंग देकर उन्हें खेलों के दांव पेंच सीखा रही हैं।

अलग पहचान बनाने की चाह ने बनाया पावर लिफ्टर
पावर लिफ्टिंग को आज भी पुरूषों का ही खेल माना जाता है क्योंकि इसमें सारा गुणा भाग शारीरिक क्षमता का होता है जिसमें प्रतिभागी तीन अलग तरीकों से भारी वजन उठाता है। लेकिन कोटा की शोभा माथुर ने इसी अवधारणा को ही बदल दिया और कई टुर्नामेंट में अपने से आधी उम्र की महिलाओं को मात देकर कई पदक अपने नाम किए। शोभा बताती हैं कि स्कूल के समय में वो खो खो खेला करती थी, समय के साथ खेलना तो छुट गया लेकिन एक दिन अपने भांजे और भांजी को पावर लिफ्टिंग करते देखा तो उसकी ललक जगी और पावर लिफ्टिंग में जाने का फैसला कर लिया। शुरूआत में तो मुश्किल लगा लेकिन जिम और प्रैक्टिस करती रही। नतीजन शोभा शिक्षक होने के बावजूद आॅल इंडिया सिविल सर्विसेज के आॅपन नेशनल में गोल्ड, एशियन गेम्स में गोल्ड, सिविल सर्विसेज की ऑपन में ब्रॉन्ज सहित कई मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। वहीं शोभा एशिया के बेस्ट लिफ्टर कैटेगरी में भी सैकंड रनरअप का स्थान हासिल कर चुकी हैं। शोभा माथुर का कहना है कि महिलाओं को अपनी झिझक को भूलकर हर क्षेत्र में आगे रहना चाहिए और अपनी काबिलियत को हमेशा निखारते रहना चाहिए।

दादा पिता के नक्शे कदम पर बनी फुटबॉल प्लेयर
कोटा से इंटरनेशनल फुटबॉल प्लेयर रहीं मीनू सोलंकी बताती हैं कि उनके दादा और पिता दोनों नेशनल फुटबॉल प्लेयर रहे, जो उन्हें फुटबॉल की और खींच ले गया। मीनू खुद इंटरनेशनल फुटबॉल प्लेयर रह चुकी हैं, और आज भी उनका फुटबॉल खेलना जारी है। मीनू का उस समय में फुटबॉल खेलने का फैसला करना जब फुटबॉल को महिलाओं के लिए नहीं माना जाता था एक साहसिक कदम था। मीनू सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ती गई जिला स्तर फिर राज्य उसके बाद नेशनल और फिर इंटरनेशनल तक खेलकर मीनू परिवार के साथ कोटा का भी नाम रोशन किया। मीनू ने साल 1997 में चीन के बुहांजा में आयोजित हुई 11वीं एशियन महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा मीनू भारत की ओर से जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश सहित कई देशों में फुटबॉल चैंपियनशिप में खेल चुकी हैं और कई मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। मीनू अभी नई उम्र की खिलाडियों को फुटबॉल के दांव पेंच सिखाने के साथ गंगापुर सिटी और सवाई मधोपुर की जिला खेल अधिकारी के रुप में कार्यरत हैं।

स्टेडियम में लड़कों को खेलते देखा और सोच लिया फुटबॉल खेलने का
मैदान पर किसी को खेलते देखकर उसके जैसे खेलने की सोचना और खेलकर दिखाना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है जो करके दिखाया कोटा की इंटरनेशनल फुटबॉल प्लेयर रह चुकी मधु चौहान ने। मधु बताती हैं कि स्कूल के समय जब जिला स्तर पर खो खो खेलने आई तो स्टेडियम में लड़कों को फुटबॉल खेलते देखा जहां फुटबॉल इतना पसंद आया कि उसे ही करियर बनाने का सोच लिया। जब पहली बार स्कूल से जिला स्तर पर खेली तो अच्छा लगा और मनोबल बढ़ता गया। जिसके बाद पिछे मुड़कर नहीं देखा और 1984 से 1989 के बीच 10 सब जुनियर नेशनल व इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं के साथ तीन नेशनल व इंटर नेशनल सीनियर प्रतियोगिता खेलकर कई पदक अपने नाम किए। मधु आज कोटा जिला खेलअधिकारी के पद पर तैनात हैं और खिलाड़ियों को फुटबॉल के गुर सिखाने के साथ में खुद भी खेलती हैं। मधु कहती हैं कि खेलने से महिलाओं की शारीरिक क्षमता बढ़ती है और आत्मविश्वास बढ़ता है इसलिए महिलाओं को अपनी झिझक निकालते हुए खेलों में आगे आना चाहिए।

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