देहरादून. शिक्षा हर इंसान के लिए जरूरी होती है. दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो बचपन से ही अंधेरी जिंदगी जी रहे होते हैं क्योंकि वे दुनिया की किसी भी चीज को नहीं देख सकते हैं. ऐसे दृष्टिहीन लोग भी पढ़ना चाहते हैं. उत्तराखंड के देहरादून में स्थित देश के इकलौते राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (NIEPVD Dehradun) में दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाने से लेकर उन्हें गेम्स तक खिलवाए जाते हैं. उनके खेलने के लिए भी विशेष तरह के उपकरण होते हैं.
एनआईईपीवीडी के प्रिंसिपल अमित कुमार शर्मा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि साल 1943 में यह संस्था ब्रिटिश सरकार ने स्थापित की थी. विश्व युद्ध में जिन सैनिकों की दृष्टि चली जाती थी, यह उनके लिए रिहैबिलिटी सेंटर के रूप में काम करता था. आज भी यहां दुर्घटना में अपनी आंखें गंवाने वाले इंडियन आर्मी के जवानों के रिहैबिलिटेशन का काम किया जाता है. राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में सेंट्रल ब्रेल प्रेस, मॉडर्न स्कूल जैसी अलग-अलग यूनिट काम करने लगी हैं. मॉडर्न स्कूल की स्थापना 1959 में की गई थी. यहां बाल वाटिका से 12वीं तक शिक्षा दी जाती है. इसके बाद कुछ यहां बीएड और एमएड जैसे कुछ प्रोफेशनल कोर्स भी कराए जाते हैं.
बच्चों के विकास के लिए कई कार्यक्रम
अमित शर्मा आगे बताते हैं कि यहां दृष्टिहीन बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए कई तरह के कार्य किये जाते हैं. यहां पढ़ाई तो करवाई ही जाती है, उसके साथ-साथ इनडोर और आउटडोर गेम्स के लिए भी इन्हें तैयार करवाया जाता है. उन्होंने बताया कि हमारे संस्थान के कई बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई गेम्स में भी मेडल ला चुके हैं. हमारे इस संस्थान से इंडियन क्रिकेट टीम को तीन कप्तान दिए हैं. वहीं वीमेन फुटबॉल टीम में भी हमारी बेटियों ने अच्छा परफॉर्म किया है. हमारे संस्थान का एक बच्चा सौरभ शर्मा 5000 और 10000 मीटर की राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय रेस में गोल्ड मेडल लेकर आया है. इस साल 11वीं और 12वीं के लिए मैथ्स और साइंस स्ट्रीम में भी पढ़ाई की जा सकेगी. देश के अलग-अलग राज्यों से यहां बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं.
FIRST PUBLISHED : July 9, 2024, 16:24 IST
