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Nainital: नैनीताल के रिटायर्ड शिक्षक विपिन चंद्र पांडे ने बुक बैंक खोलकर न जाने कितने गरीब बच्चों की मदद की है. इसकी मदद से बच्चों को किताबों के अभाव में पढ़ाई अधूरी नहीं छोड़नी पड़ती.
नैनीताल. अक्सर हमें समाज में ऐसे मामले देखने को मिल जाते हैं, जहां निर्धनता की बेड़ियां कुछ होनहार बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ने देती. ऐसे ही बच्चों की मदद कर रहे हैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रिटायर्ड शिक्षक विपिन चंद्र पांडे. इन्होंने निर्धन बच्चों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए और उन्हें मुफ्त किताबें उपलब्ध करवाने के लिए बुक बैंक खोला है. यहां कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की किताबें साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें जैसे बैंक, एनडीए, पीएमटी, आर्मी और अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे निर्धन असहाय बच्चों को निशुल्क दी जाती हैं.
ऐसे हुई बुक बैंक की शुरुआत
उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हिंदी प्रवक्ता पद से रिटायर्ड शिक्षक विपिन चंद्र पांडे ने बताया कि जब वो एचएन इंटर कॉलेज में पढ़ाते थे, तो कुछ बच्चों को अक्सर कई दिन कक्षाओं के बाहर खड़ा देखते थे. उन्होंने एक दिन डांटते हुए बच्चों से कक्षा से बाहर खड़े होने का कारण पूछा, इस पर बच्चों ने उनके पास कई विषयों की किताबें न होने की बात कही और बताया कि उनके पिताजी को अभी दिहाड़ी नहीं मिली है. जिस वजह से वो किताबें नहीं खरीद पा रहे हैं. जिसके बाद उन्होंने गरीब और असहाय बच्चों के लिए बुक बैंक बनाकर गरीब बच्चों को मुफ्त पुस्तकें देने की ठान ली और स्कूल में ही एक बुक बैंक खोल लिया.
रिटायरमेंट के बाद खोला बुक बैंक
विपिन चंद्र पांडे बताते हैं कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद भी बच्चों के लिए ‘धार बिठोरिया नंबर 1 हल्द्वानी’ में अपने प्रतिष्ठान पर अपने पिता के नाम पर ‘श्री भोला दत्त पाण्डे स्मृति बुक बैंक’ के नाम से एक बुक बैंक खोला. इस बुक बैंक से आज हल्द्वानी के टैंपो चालक, मजदूरों और अन्य गरीब तबके के लोगों के बच्चे किताबें लेकर पढ़ रहे हैं और कई अपनी पढ़ाई पूरी भी कर चुके हैं.
एक साल के लिए मिलती हैं किताबें
विपिन चंद्र पांडे द्वारा 100 किताबों से शुरू किया गया बुक बैंक में आज 1 हजार से ज्यादा किताबें हैं. जिनमें स्कूल से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि एक साल के लिए बच्चों की कक्षा के हिसाब से उन्हें मुफ्त में किताबें दी जाती हैं. एक साल के बाद जब बच्चा पास हो जाता है तो वो उस कक्षा की किताबें वापिस कर जाता है और उसे दूसरी कक्षा की किताबें मुफ्त दी जाती हैं. उन्होंने बताया कि इस बुक बैंक का लक्ष्य है कि कोई भी आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी किताबों की वजह से पढ़ाई से वंचित न रहे.
बच्चों को मिल रहा लाभ
इस बुक बैंक का लाभ स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चे भी लेते हैं. एच एन इंटर कॉलेज में 9वी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने बताया कि उन्होंने इस बुक बैंक से ही अपने कोर्स की किताबें ली हैं. इससे पहले भी पिछली कक्षाओं के कोर्स की किताबें भी वो यहां से ले चुके हैं. उन्होंने बताया कि यह बुक बैंक उनकी पढ़ाई पूरी करने में बेहद सहायक है.
Nainital,Uttarakhand
January 13, 2025, 15:53 IST
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