पहाड़ के लड़कों को दुल्हन मिलना मुश्किल, हैरान करने वाली हैं लड़कियों की डिमांड


तनुज पाण्डे/ नैनीताल.उत्तराखंड में क्या कुमाऊं और क्या गढ़वाल, हर जगह एक जैसा हाल. राज्य के पर्वतीय जिलों में रहने वाले लड़कों को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं. दरअसल लड़कियां पहाड़ में रहने वाले लड़कों के साथ ग्रामीण परिवेश में जीवन नहीं बिताना चाह रही हैं. उनकी ख्वाहिश है कि वे देहरादून, हल्द्वानी या फिर दिल्ली जैसे शहरों में जाकर बसें. लड़कियां चाहती हैं कि लड़के का शहर में अपना घर हो, अच्छी नौकरी या कोई अच्छा कारोबार हो. वहीं लड़कियों के माता-पिता भी बेटी के भविष्य के लिए सोचते हुए उनकी इस डिमांड के अनुसार रिश्ते ढूंढ रहे हैं और पहाड़ के लड़कों को दरकिनार कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, अच्छे स्कूल का न होना, रोड कनेक्टिविटी आदि की समस्या रहती है. वहीं जो लड़के खेतीबाड़ी में अपने परिवार का हाथ बंटाते हैं, उनके लिए शादी के बाद शहर में बसना मुश्किल होता है. किसी कारणवश वे चले भी जाते हैं, तो इससे पहाड़ों में पलायन को बल मिलता है.

नैनीताल जिले के रहने वाले युवाओं से Local 18 ने जब बात की, तो उन्होंने बताया कि उनके लिए कई रिश्ते आ चुके हैं, लेकिन लड़की वालों की डिमांड सरकारी नौकरी, मैदानी इलाकों में घर या जमीन का होना होता है. यहां के ज्यादातर युवा पढ़े लिखे हैं और ग्रेजुएट हैं. वह अपने गांव में रहकर ही स्वरोजगार, खेतीबाड़ी आदि के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रहे हैं. ज्यादातर विवाह योग्य लड़के 30 साल की उम्र पार कर चुके हैं. लड़की पक्ष की तरफ से रखी गई इन शर्तों के सामने लड़कों के कोई और गुण मायने नहीं रखते.

घरवालों को है शादी की चिंता

नैनीताल जिले के ग्रामीण मोहन (बदला हुआ नाम) ने Local 18 को बताया कि उनके दो बेटे हैं, जो विवाह योग्य हो चुके हैं. लेकिन गांव में सड़क, स्वास्थ्य सुविधाओं आदि का अभाव है और उनके बच्चे भी गांव में काश्तकारी करते हैं. इस वजह से उनकी शादी नहीं हो पा रही है. लड़कियां उनके गांव नहीं आना चाहती. पहले के जमाने में रिश्तेदारों के माध्यम से शादियां तय हो जाती थीं, लेकिन अब पहाड़ों में लड़कों को दुल्हन मिलना मुश्किल हो गया है. कोई भी लड़की अब गांव का परिवेश अपनाना नहीं चाहती हैं.

पहाड़ों में पलायन को मिलता है बल

मौजूदा समय में उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में सड़क का न होना, शिक्षा की बेहतर सुविधा न होना, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी इसके मुख्य कारण हैं. पहाड़ों में बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत के कई मामले भी देखे गए हैं. ऐसे में लड़कियां पहाड़ में जीवन यापन नहीं करना चाहती हैं. वहीं आर्थिक रूप से सामान्य परिवार का विवाह योग्य कुंवारा लड़का अब पहाड़ के परिवारों की जिम्मेदारी बनता जा रहा है. ऐसे समय में अगर पहाड़ के सामान्य घरों से आने वाले लोग लड़की वालों की मांग को ध्यान में रखकर कर्ज लेकर या फिर अपनी पहाड़ की जमीनों को महानगरों के बिल्डरों को बेचकर हल्द्वानी, देहरादून, दिल्ली आदि शहरों में जमीन या घर लेते हैं, तो ऐसे में पहाड़ से पलायन को बल मिलता है.

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