हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़. अक्सर अंधविश्वास के चलते तमाम अमानवीय कृत्य करते हुए कई घटनाएं सामने आते रहती हैं, जिससे एक सभ्य समाज की कल्पना में बुरा असर पड़ता है. इसे जड़ से खत्म करने के तमाम प्रयास भी हो रहे हैं और ये प्रयास देखने को भी मिले हैं. उत्तराखंड के सीमावर्ती सुदूर जिले पिथौरागढ़ में जहां के स्कूली बच्चों को धर्म, अंधविश्वास और विज्ञान में फर्क समझाया जा रहा है. इस अभियान का मकसद है कि बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़े और वह अंधविश्वास की चपेट में न आएं.
उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित इस विज्ञान लोकप्रियता अभियान को जनपद के सभी सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है, जिसमें बच्चों के बौद्धिक स्तर को बढ़ाने का काम अनेक माध्यमों से किया जा रहा है. इस अभियान का मकसद ग्रामीण इलाकों के बच्चों में विज्ञान के प्रति जागरूकता फैलाना है, जिससे बच्चे किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में न आकर अपने जीवन को बेहतर बना सकें.
विज्ञान की महत्वता
इस अभियान को सफल बनाने में लगे पिथौरागढ़ के शिक्षक विप्लव भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि आज के दौर में विज्ञान की महत्वता को बच्चों तक पहुंचाने की कोशिश इस अभियान में की जा रही है, जिससे बच्चे धर्म से जुड़े अंधविश्वास वाली चीजों में न पड़े और किसी चमत्कार के पीछे विज्ञान की असली वजह को पहचान सकें.
आज भी पहाड़ों में अंधविश्वास
इस तरह के अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में इसलिए भी जरूरी हैं कि आज भी बच्चों में शारीरिक, मानसिक और प्राकृतिक रूप से होने वाले परिवर्तनों को कई जगहों में अंधविश्वास की तरह देखा जाता है, जिसे बच्चे ही बदल सकते हैं और समाज में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं. पिथौरागढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता कुंदन सिंह चौहान ने कहा कि इस तरह के अभियान पहाड़ों के लिए काफी जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई कुरीतियां देखने को मिलती हैं, जिन्हें बदला जाना बेहद जरूरी है. यह सब तब मुमकिन है, जब बच्चों का रुझान विज्ञान के तरफ बढ़ेगा.
.
FIRST PUBLISHED : November 23, 2023, 15:09 IST
