देहरादून. कुछ साल पहले तक इगास का जो पर्व पहाड़ तक सीमित था, वो अब शहरों में भी धूमधाम से मनाया जा रहा है. देहरादून से लेकर पिथौरागढ़ तक इगास को लेकर भेलो के आर्डर आये हैं और स्कूल लेवल पर भी एक्टिविटीज करवाई जा रही है. मान्यता है कि भगवान राम के लंका विजय की खबर गढ़वाल में 11 दिन बाद मिली थी. दिवाली के 11 दिन बाद यह इगास मनाने की परम्परा है.
दीपावली के ठीक 11वें दिन गढ़वाल के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी अपने सैनिकों के साथ युद्ध जीत वापस लौट आए तो इसी खुशी में दिवाली मनाई गई. उत्तराखण्ड में इस बार इगास लोकपर्व को जहां कई संगठन मना रहे हैं तो वहीं प्राइवेट स्कूलों में भी इगास पर खेले जाने वाले भेलो बनना सिखाया गया. एक्टिविटी के तौर पर फाइनल रिजल्ट में 5 मार्क्स भी इस पर दिए जायेंगे ताकि स्कूली स्तर पर ही बच्चों को लोकपर्व की महत्ता पता चले.
भेलो बनाने के लिए कई पहाड़ के युवक वर्कशॉप भी कर रहे हैं. मसूरी, चमोली, पिथौरागढ़ से भेलो बनाकर भेजे है. सरकार ने तो बाकायदा सेल्फी प्रतियोगिता भी करवाई हैं. परिवार के साथ सेल्फी भेजने की भी गुजारिश की है. इगास मानने को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे युवक बताते हैं कि पहाड़ में कई लोग तो अब खास तौर पर छुट्टी लेकर घर आने लगे हैं. लोगों को लोकपर्व की महत्ता समझ आने लगी है.
जनप्रतिनिधियों को भी इगास पर अपने अपने इलाकों में भेजा गया है. पिछले 4 साल में इगास का पर्व खूब वृहद स्तर पर मनाया जा रहा है. लोगों से अपने घर पर पर्व मनाने की मुहिम राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने शुरू की थी. अब तक जो लोकपर्व सिर्फ बुज़ुर्गो की जुबान पर थे वो अब स्कूली स्तर पर समझाए जा रहे हैं ताकि पहाड़ की संस्कृति, सभ्यता को बचाया जा सके.
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FIRST PUBLISHED : November 04, 2022, 12:12 IST
