डाक टिकट का जुनून, 11 साल की उम्र में चढ़ा शौक, 200 से ज्यादा देशों के स्टांप का है कलेक्शन


हिना आज़मी/ देहरादून. आज जब लोग चिट्ठियां भेजना लगभग भूल चुके हैं. ईमेल और वाट्सएप से दुनिया ग्लोबल से लोकल होने की तरफ दौड़ रही है. ऐसे में डाक टिकटों का संग्रह करने के शौकीन लोग बिरले ही होते हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं देहरादून के विनय गुप्ता. 11 साल की उम्र से डाक टिकट कलेक्ट कर रहे विनय को हमेशा से चिट्ठियों के ऊपर चिपकाए गए ये डाक टिकट अच्छे लगते थे. स्कूल के दिनों से उन्होंने डाक टिकट संग्रह करना शुरू किया. आज उनके पास 200 से ज्यादा देशों के डाक टिकट हैं. पिछले कुछ दशकों की महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक घटनाओं से जुड़े डाक टिकट उनके भंडार में संग्रहित हैं.

लोकल18 से बातचीत में विनय गुप्ता बताते हैं कि उन्हें 11 साल की उम्र से ही डाक टिकट कलेक्शन करने का शौक था. मसूरी हॉस्टल से पढ़ाई के दौरान वे अपने दोस्तों के घर से आने वाली चिट्ठियों के डाक टिकट संग्रह किया करते थे. इस हॉस्टल में भारत से बाहर के कई देशों के छात्र रहते थे. उनके घर से आने वाली चिट्टियों के ऊपर चिपके डाक टिकट आज भी विनय के पास हैं. उन्होंने बताया कि डाक टिकट अलग-अलग रंग, आकार और जानकारी के लिए अच्छे होते हैं. उन्होंने बताया राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बुकलेट निकाली थी, उसमें कई डाक टिकटें विनय गुप्ता की थी. इसमें नेपाल द्वारा जारी वह डाक टिकट भी शामिल है, जिस पर विक्रम सम्वत 2024 लिखा है. इस साल राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समय नेपाल का यह पोस्टल स्टांप काफी चर्चा में रहा था.

KBC विजेता भी कलेक्ट करते थे डाक टिकट
विनय गुप्ता ने लोकल 18 को बताया कि साल 2008 में जब शेयर मार्केट का क्रैश हुआ था तो स्टैंप कलेक्शन का बूम आ गया था. विनय मशहूर टीवी रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में 1 करोड़ रुपए का इनाम जीतने वाले अनिल का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान का श्रेय डाक टिकटों को दिया था. विनय गुप्ता के डाक कलेक्शन में स्विट्जरलैंड गवर्नमेंट की ओर से महात्मा गांधी पर जारी किए गए 3D टिकट, दून पर रिलीज हुए स्पेशल कवर, अशोक कालीन शिलालेख, सर जॉर्ज एवरेस्ट, राष्ट्रीय जल संरक्षण संस्थान और नेवी के स्पेशल कवर भी शामिल हैं.

स्कूली बच्चों को जोड़ रहे
विनय गुप्ता ने साल 2017 में युवा फिलेटलिक एसोसिएशन बनाई. इसके माध्यम से वह देहरादून के स्कूलों में जाकर प्रदर्शनी लगाते हैं. छात्र-छात्राओं को डाक टिकट के बारे में जानकारी देते हैं. राजधानी देहरादून के राजभवन और कई बड़े स्थानों पर विनय गुप्ता प्रदर्शनी लगा चुके हैं. विनय ने लोकल18 को बताया कि वह हर साल करीब 25000 रुपए के डाक टिकट खरीदते हैं.

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