रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. उत्तराखंड के जंगलों में लगने वाली आग प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या बन कर उभरी है. 20022 की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में हर साल औसतन 1,978 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से सुलगता है. इससे वनस्पति एवं जैविक संपदा का नुकसान तो होता ही है, हिमालयी क्षेत्र का पर्यावरण भी बुरी तरह प्रभावित होता है. पिछले 12 वर्षों में उत्तराखंड के जंगलों में आग की 13,574 घटनाएं हुई हैं, फिर भी आग बुझाने की विभागीय तकनीकी पारंपरिक ही है.
उत्तराखंड के जंगलों में फायर सीजन में कई लाखों हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो जाते हैं. जिस कारण से जंगल के पेड़, पशु, पक्षी और पर्यावरण को भी काफी नुकसान इसमें पहुंचता है. गौरतलब है कि 15 फरवरी से लेकर 15 जून तक फायर सीजन रहता है. इस दौरान जंगलों में आगजनी देखने को मिलती है. इसी को देखते हुए अल्मोड़ा जिले में हंस फाउंडेशन की ओर से वन अग्निशमन एवं रोकथाम परियोजना के तहत बच्चों को कठपुतली नृत्य दिखाया गया, जिसमें जंगलों की आग को कैसे रोका जाए और पशु पक्षी और हमारे पेड़-पौधे में क्या प्रभाव पड़ता है, इसके बारे में भी उन्हें बताया गया. अल्मोड़ा के केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को कठपुतली नृत्य के माध्यम से जानकारी दी गई.
छात्रों को किया गया जागरूक
छात्र धैर्य बोरा ने कहा कि स्कूल में कठपुतली नृत्य के माध्यम से जंगलों में लगने वाली आग को रोकने से संबंधित काफी जानकारी छात्रों से साझा की गई. आज से कुछ साल पहले तक जब कम्युनिकेशन की कोई भी सुविधा नहीं हुआ करती थी, तो कठपुतली के माध्यम से लोगों को जानकारी दी जाती थी. इस तरीके से उनके स्कूल में भी कठपुतली नृत्य के द्वारा जंगलों की आग की रोकथाम और उनसे होने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई. जंगल नहीं जलाने चाहिए. इस वजह से हमारे पेड़ पौधे और कई जंगली जानवर को उसमें नुकसान पहुंचता है.
सभी को लेना चाहिए संकल्प
छात्रा गायत्री जोशी ने कहा कि कठपुतली नृत्य में काफी अच्छी जानकारी दी गई कि हमें जंगल में आग नहीं लगानी चाहिए. इस कार्यक्रम में दिखाया गया कि पेड़-पौधे के साथ तमाम जंगली जानवर को कितना नुकसान पहुंचता है, जिस वजह से वह अपना घर खो बैठते हैं. हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हमें जंगल नहीं जलाने चाहिए. जैसे हमारा घर है, वैसे ही जंगल जानवरों का घर है.
हंस फाउंडेशन चला रहा जागरूकता कार्यक्रम
द हंस फाउंडेशन के कोऑर्डिनेटर रजनीश रावत ने बताया कि जंगलों की आग से होने वाले प्रभाव के बारे में हंस फाउंडेशन लगातार लोगों के बीच जाकर जागरूक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. उत्तराखंड के चार जिलों में कार्यक्रम की शुरुआत की गई हैं. प्रत्येक विकासखंड के 100 गांवों में जाकर लोगों को इन कार्यक्रमों के माध्यम से हम जागरूक कर रहे हैं. इसमें हम जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली नृत्य और क्विज कंपटीशन कर रहे हैं. इसी को देखते हुए स्कूलों में भी कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को वनाग्नि को लेकर जागरूक किया जा रहा है क्योंकि बच्चे जल्द इन चीजों को समझ पाते हैं.
.
Tags: Almora News, Local18, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : March 2, 2024, 16:19 IST
