उत्तराखंड बोर्ड पहली बार छात्रों को अंक सुधार परीक्षाएं/बैक पेपर देने की सुविधा दे रहा है. छात्र अगर एक या दो विषय में फेल हुए हैं तो वे बैक परिक्षा देकर अपने अंक सुधार सकते हैं. इससे छात्रों का एक साल खराब होने से भी बचेगा. आज से शुरू हुई उत्तराखंड बोर्ड की अंक सुधार परीक्षा 12 अगस्त तक आयोजित होंगी. इसमें विभिन्न विषयों में फेल हुए छात्र परीक्षा दे रहे हैं.
दरअसल उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद की परीक्षाएं अप्रैल महीने तक समाप्त हो जाती है और मई माह के अंतिम दिनों या जून में परीक्षाफल घोषित कर दिया जाता है. परीक्षाफल जारी होने के बाद जो छात्र पास हो गये वह नये शैक्षणिक सत्र से आगे की कक्षाओं में प्रवेश ले लेते थे, और जो किसी कारणवश एक या दो विषय में फेल हो गये तो उन्हें अगले साल का इंतजार करना पड़ता था. जबकि अन्य बोर्ड में छात्र बैक परीक्षा देने के बाद पास होने पर अगली कक्षा में प्रवेश ले सकता है. ठीक इसी तर्ज पर नई शिक्षा निति के तहत 2023 से उत्तराखंड बोर्ड भी बैक परीक्षा करवाने जा रहा है. वैसे तो इन परीक्षाओं को जून अंतिम दिनों या जुलाई पहले सप्ताह तक पूरा हो जाना था, लेकिन इस साल अगस्त माह में ये परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं. राईका चौबट्टा में तैनात शिक्षक मयंक बताते हैं कि सरकार द्वारा सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर लिया गया अंक सुधार का यह फैसला सराहनीय है. इसका लाभ छात्रों को मिलेगा. वह बताते हैं कि इस बार केवल हिंदी विषय में 4 हजार से अधिक छात्र फेल हो गये थे, अंक सुधार परीक्षा के कारण इन छात्रों के पास दोबारा पास होने व साल बर्बाद होने से बचाने का अवसर है.
इम्प्रूवमेंट परीक्षाओं को लेकर तैयारी पूरी
बैक परीक्षाओं को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा तैयारियां पूरी है. पौड़ी जिले में इसके लिए एक स्ट्रांग रूम बनाया गया है. जहॉ परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिका जमा करानी होगी. बता दें कि इस बार कोटद्वार में स्ट्रांग रूम तैयार किया गया है, जबकि अन्य परिक्षाओं के लिए जिलेे में दो रूम पौड़ी और कोटद्वार में बनाए जाते थे, लेकिन बैक परीक्षाओं के लिए कोटद्वार में ही बनाया गया है. 7 अगस्त से शुरू हुई उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद अंक सुधार परीक्षायें 12 अगस्त तक आयोजित होंगी.
एक विषय में फेल होने पर छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका
राजकीय इंटर कॉलेज खण्डाह के प्राचार्य राजेन्द्र प्रसाद किमोठी का मानना है कि पहली बार आयोजित हो रहे अंक सुधार परीक्षा से कई छात्रों का एक साल बर्बाद होने से बचेगा. उन्होंने ने बताया कि सरकारी स्कूलों में गरीब और गांव के छात्र अधिकांश संख्या में पढ़ने आते हैं. इन छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य घर के काम भी करने होते हैं. ऐसे में कई बार ये छात्र बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी किसी एक विषय में फेल हो जाते थे, तो पहले की तरह इन्हें सीधे अगले साल का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है छात्र अंक सुधार परीक्षा पास कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकता है.
