भूस्खलन बना आफत: घर से नैनीताल 1.5 KM दूर, लेकिन 4 हजार लोगों को तय करना पड़ता है 20 किलोमीटर का सफर


रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल में मुख्य शहर से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कृष्णापुर क्षेत्र, यहां लगभग 3 से 4 हजार की आबादी रहती है. इस क्षेत्र के लोग नैनीताल को जाने वाली मुख्य सड़क से वंचित हैं. अपने घरों से नैनीताल आने के लिए इन्हें पैदल रास्ता ही अपनाना पड़ता है. गाड़ी से आने वाला रास्ता पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पड़ा है. स्थानीय लोगों को कभी वाहन से नैनीताल आना हो, तो करीब 20 से 22 किलोमीटर का लंबा रास्ता घूमकर आना पड़ता है.

साल 2017 में नैनीताल के बलियानाला क्षेत्र में काफी भूस्खलन हुआ था. उस भूस्खलन में नैनीताल को कृष्णापुर से जोड़ने वाला मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ और पूरी सड़क खाई में समा गई. उसके बाद से अब तक यह रास्ता कभी तैयार ही नहीं हो पाया. जबकि सड़क का कुछ हिस्सा पिछले साल आई आपदा में भी क्षतिग्रस्त हुआ था.

स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों को भी हो रही परेशानी
स्थानीय निवासी कमला देवी ने कहा कि सड़क टूटी होने से स्कूल जाने वाले बच्चों को काफी परेशानी होती है. नैनीताल नगरपालिका के पास रास्ता बनाने के लिए पैसा नहीं होता है. स्थानीय निवासी रेखा जोशी ने कहा कि कृष्णापुर में रहने वाले क्षेत्रवासियों को पैदल चलकर ही नैनीताल पहुंचना पड़ता है. अगर कभी किसी के घर में कोई बड़ी परेशानी हो जाए और गाड़ी का रास्ता अपनाना पड़े तो ज्योलीकोट होते हुए लगभग 20 से 22 किलोमीटर लंबा रास्ता लेना पड़ जाता है. कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि इतना लंबा रास्ता अपनाने के बाद नैनीताल आने से बेहतर तो वे लोग हल्द्वानी ही चले जाएं. पिछले 5 वर्षों से सड़क नहीं बनने की वजह से क्षेत्रवासी काफी परेशान हैं.

कृष्णापुर वार्ड के सभासद कैलाश रौतेला ने बताया कि वार्ड की कई सड़कें बुरी तरह से टूटी पड़ी हैं. तल्लीताल से कृष्णापुर को जोड़ने वाली सड़क आपदा में टूट गई थी. इसके लिए कृष्णापुर से कूड़ाखड्ड तक गाड़ियों के लिए रास्ता बनाने को लेकर प्रस्ताव पास होना है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि आने वाले हफ्ते से काम शुरू हो जाएगा.

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