मेजर दिग्विजय सिंह होंगे कीर्ति चक्र से सम्मानित, मणिपुर में विद्रोहियों को किया था नेस्तनाबूद


कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल.इस बार जिन वीर जवानों को कीर्ति चक्र (Kirti Chakra 2024) से सम्मानित किया जाएगा, उनमें एक नाम उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के मेजर दिग्विजय सिंह रावत का भी है. अदम्य साहस के लिए 21 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के ट्रूप कमांडर मेजर दिग्विजय सिंह रावत (Major Digvijay Singh Rawat) को ’कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया जाएगा. कीर्ति चक्र के लिए नाम जारी होने की सूचना मिलने के बाद से ही मेजर दिग्विजय के परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लगना शुरू हो गया है. दिग्विजय सिंह रावत मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के धूमाकोट क्षेत्र के रहने वाले हैं. मेजर दिग्विजय ने स्कूली शिक्षा श्रीनगर गढ़वाल से ग्रहण की. यहां नगर क्षेत्र के डांग में भी उनका घर है, जहां वर्तमान में उनके माता-पिता रहते हैं. मेजर दिग्विजय सिंह के पिता दिगम्बर सिंह रावत गढ़वाल विश्वविद्यालय के खेल विभाग से 2019 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं. बेटे को कीर्ति चक्र मिलने पर वह बेहद खुश हैं.

मणिपुर में विद्रोहियों को किया नेस्तनाबूद

मणिपुर में खुफिया नेटवर्क स्थापित कर घाटी के विद्रोही समूहों की हमले की योजना को ध्वस्त कर वीआईपी को बचाने के लिए 21 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के ट्रूप कमांडर मेजर दिग्विजय सिंह रावत को ’कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया जा रहा है. दरअसल बीते साल 5 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर में मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण करने पहुंचे थे. एक ऑपरेशन के दौरान उनको सूचना मिली कि घाटी के विद्रोही समूह एक वीआईपी को मणिपुर में निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं. इस सूचना के आधार पर मेजर रावत ने अपने एक सूत्र को सक्रिय किया, जिसने विद्रोही समूहों को भटका दिया. वह सूत्र सफलतापूर्वक विद्रोही समूह को उसी इलाके में ले गया, जहां मेजर दिग्विजय सिंह की टीम उनका इंतजार कर रही थी. आतंकवादियों ने सैनिकों को देखते ही ऑटोमेटिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन गोलियों की बौछार के बीच भी हार न मानते हुए मेजर रावत ने अपनी टीम को कुशलता से नियंत्रित किया और खुद रेंगते हुए आतंकवादियों के एक स्वयंभू कैप्टन को मार गिराया और दूसरे को घायल कर दिया. खुफिया जानकारी के अनुसार, ये दोनों ही असम राइफल्स पर घात लगाकर हमला करने के मास्टरमाइंड थे. इसी तरह, 26 मार्च 2023 को भी एक अन्य ऑपरेशन के दौरान विद्रोही समूहों के घुसपैठ की सूचना मिली. उसमें भी मेजर दिग्विजय ने अपने शौर्य और पराक्रम को दिखाते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया और घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया.

टेक्निकल एंट्री से बने सेना का हिस्सा

मेजर दिग्विजय सिंह रावत का जन्म 27 जुलाई 1990 को श्रीनगर में हुआ. दिग्विजय ने हाईस्कूल तक की पढ़ाई सेंट थेरेसॉस कॉन्वेंट स्कूल श्रीनगर गढ़वाल व इंटरमीडिएट की पढ़ाई 2009 में केंद्रीय विद्यालय श्रीनगर से उत्तीर्ण की. पीसीएम ग्रुप से 80 प्रतिशत होने के चलते एनडीए पास करने के बाद उन्हें एसएसबी इंटरव्यू के लिए चुना गया. इंटरव्यू में पास होने के बाद पहले दिग्विजय ने एयरफोर्स में जाने की सोची, लेकिन यहां साक्षातकार में क्वालिफाई न होने के चलते उन्होंने आर्मी के टेक्निकल एंट्री के क्षेत्र को चुना.

2014 में स्पेशल फोर्स का बने हिस्सा

दिगम्बर सिंह रावत बताते हैं कि उनके बेटे ने रुड़की में बंगाल इंजीनियरिंग यूनिट में सेवा देने के बाद जून 2014 में पैरा (स्पेशल फोर्सेज) को चुनकर अपनी सेवाएं देना शुरू की. दिग्विजय पढ़ने में होशियार होने के साथ ही खेलकूद में रूचि रखता था. उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान दिग्विजय लॉन टेनिस में उत्तराखंड चैंपियन भी रह चुका है और केंद्रीय विद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर लॉन टेनिस और बैडमिंटन में उपविजेता भी रहा है.

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