मैडम! तीन साल बीत ग्या छै, अब तो सुणलो…
कोटा। मैडम! थोड़ा घणा इब तो तीन साल बित ग्या, अब तो म्हारी भी पुकार सुण लो…। थारे आगे हाथ जोड़ र बिनती करुं, म्हारे पति की मौत हुइया घणो टाइम होग्यो, म्हारी दोनों छोरियां ही म्हारी देखभाल कर रही है, अब तो आप पेंशन शुरू करा दो, थारी मेहरबानी होगी। कुछ इस तरह दोनों हाथ जोड़कर बिनती कर रही थी। कोटा में पेंशन विभाग के आयोजित कार्यशाला में बूंदी से पहुंची फोरी बाई उर्फ केसर बाई। वे यहां पर अपनी दोनों बेटियों के साथ आई थी। फोरी बाई ने बताया कि उनके पति गोपाल सिंचाई विभाग में कार्य करते थे। उनका रिटायरमेंट 2001 में हो गया। जब तक वे जिंदा थे, तब तो उनको पेंशन बराबर मिली, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद से ही पेंशन बंद हो गई। गोपाल की मृत्यु 2021 में हुई थी। जिसके बाद से ही उनकी बेवा पत्नी फोरी बाई को पेंशन के नाम पर सरकार से एक रुपया तक नहीं मिला है। इस बुढ़ापे में उनकी दोनों बेटियां ही उनका सहारा है। उन्होंने बताया कि बड़ी बेटी ममता की शादी हो चुकी है। उसका भी अपना परिवार है। फिर भी वो मुझे और मेरी छोटी बेटी दीक्षा को संभाल रही है। वहीं दीक्षा पढ़ाई करने की उम्र में घर-घर बर्तन साफ करने का काम कर रही है। ताकि अपना और अपनी मां का पेट भर सके। लेकिन इनकी मजबूरी से अधिकारियों को कोई मतलब ही नहीं है। तभी तो वर्ष 2021 के बाद से लेकर सिंचाई विभाग के मृतक कर्मचारी गोपाल की बेवा होने के आठ दस्तावेज दे चुकी फोरी बाई उर्फ केसर बाई की अभी तक पेंशन शुरू नहीं की गई है। फोरी बाई वर्ष 2021 से ही पेंशन के लिए बूंदी और कोटा के बीच चक्कर काट रही है। कोटा के अधिकारी बूंदी सिंचाई विभाग से लिखवाकर लाने को कहते हैं, जबकि बूंदी के अधिकारी लिखकर देने को तैयार नहीं है।
मृतक कर्मचारी की पत्नी का नाम गलत
सिंचाई विभाग बूंदी के मृतक कर्मचारी गोपाल की पत्नी का नाम पीपीओ में उसने केसर बाई लिखवा दिया था। जिसके कारण विभाग फोरी बाई को मृतक कर्मचारी की पत्नी तो मान रहा है, लेकिन अभी तक पेंशन शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर फोरी बाई ने पिछले तीन साल में आठ ऐसे दस्तावेज जमा करा दिए हैं जिनसे प्रूफ होता है कि वे ही मृतक कर्मचारी की पत्नी है। इसको लेकर उन्होंने एक शपथ पत्र भी दिया है। इसके अलावा दो अन्य लोगों के शपथ पत्र भी दे चुकी है। वहीं आधार कार्ड, राशन कार्ड सहित अन्य सरकारी मान्यता के दस्तावेज विभाग में दे चुकी हैं।
850 रुपए देकर कोटा आई थी
बूंदी में सिंचाई विभाग में काम करने वाले कर्मचारी गोपाल की विधवा पत्नी फोरी बाई अपनी दोनों बेटियों ममता और दीक्षा के साथ सोमवार को बूंदी से कोटा आई थी। उनका कहना था कि पेंशन विभाग में 20 मई को कार्यशाला होने की जानकारी मिलने पर एक बार फिर उम्मीद के साथ अपनी दोनों बेटियों को साथ लेकर यहां आई हूं। बस में बहुत ज्यादा भीड़ होने के कारण बूंदी से ही आॅटो कर लिया था। अब तो हमारे पास जाने के भी रुपए नहीं है। विभाग की मैडम से हाथ जोड़कर बिनती की है कि इस बार तो मुझे निराश नहीं भेजे। मेरी स्थिति बहुत खराब है।
एजेंसी में फोन उठाते नहीं, यहां कोई सुनता नहीं
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हमीदपुरा जिला बूंदी से 30 जून 2023 को रियाटर हुए द्वितीय श्रेणी के शिक्षक मुश्ताक अहमद अंसारी का कहना था कि वे लोन लेना नहीं चाहते हैं। आईएफएमएस 3.0 एजेंसी में आॅनलाइन में नो का आॅप्शन ही नहीं आ रहा है। इस बारे में मैंने कई बार यहां पर शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। बल्कि यहां से मुझे एजेंसी का फोन नंबर दे दिया। जिस पर कॉल करने पर कोई रिसीव ही नहीं कर रहा है। समस्या से परेशान हो चुका हूं। कई बार कहने के बावजूद निस्तारण नहीं हो रहा है। आज भी इसी समस्या को लेकर बूंदी से कोटा पेंशन विभाग में आया हूं। लेकिन निराश होकर ही जाना पड़ रहा है।
नाम में अंग्रेजी में स्पेलिंग गलत है
हिंडौली से आए जगमैल सिंह का कहना था कि वह शिक्षा विभाग से रिटायर हुए हैं। उनके नाम की अंग्रेजी की स्पेलिंग में गलती है। समस्या तो बहुत छोटी है। मगर यहां पर पहुंचा तो अधिकारियों ने मना कर दिया। उनका कहना है कि अपने ही विभाग से गलती को सही करवाकर लेकर आओ। अब वापस जा रहा हूं। आज बस में जगह नहीं थी तो 650 रुपए में आॅटो करके यहां आया था। अब फिर से हिंडौली जाऊंगा। वहां से करेक्शन करवाकर अब फिर अगली तारीख पर यहां आना पड़ेगा।
एक साल से अटका रखी फैमिली पेंशन
राजकुमारी दीक्षित ने बताया कि वो एक साल से पेंशन विभाग चक्कर लगा रहे लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है। पेंशन विभाग में राजकुमारी दीक्षित पिता देवीशंकर दीक्षित को नवम्बर 22 से फैमली पेंशन मिलनी है। कोर्ट ने भी आदेश जारी कर दिए है। लेकिन हर बार कागज में कमी बताकर टाला जा रहा है। एक वर्ष पहले अप्रैल 23 आवेदन किया था। पूर्ण दस्तावेज कई बार जमा करा दिए लेकिन अभी तक किसी न किसी बहाने से अटका रखी है। आज विभाग में जनसुनवाई कार्यक्रम भी अर्जी लगाई। सुनवाई में कहा गया कि उपकोषाधिकारी कोटा को पत्रावली भेज रखी है। जनसुनवाई में टालने के अलावा कोई रिलीफ नहीं मिली।
टालते रहते हैं अधिकारी
जैसे-तैसे पेंशनधारी या उनकी पत्नी अपनी समस्या लेकर झालावाड़ से यहां आते हैं। लेकिन उनकी समस्याओं का निस्तारण होता ही नहीं है। अधिकारी उन्हें अपने ही विभाग से लिखवाकर लाने का कहकर टाल रहे हैं। जबकि वे चाहे तो समस्या का समाधान तुरंत हो सकता है। मगर चक्कर पर चक्कर कटवाते रहते हैं।
– भंवरसिंह राजावत, जिलाध्यक्ष, पेंशनर्स समाज, झालावाड़
जिला स्तर पर लगाएं शिविर
पेंशनर्स का मतलब ही बुजुर्ग है, ऐसे में उनको लंबी यात्रा कर कोटा आने में परेशानी होता है। अगर संभव हो तो इनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर ही शिविर लगाएं जाने चाहिए। ताकि इनको कम से कम आने-जाने की परेशानी से तो राहत मिल सके।
– दिनेशचंद्र गुप्ता, जिलाध्यक्ष, पेंशनर्स समाज, बारां
शिविर में पहुंचे अधिकतर पेंशनर्स की समस्या का मौके पर ही निस्तारण किया गया है। ज्यादातर त्रुटियां विभागीय स्तर की है, जो मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। फिर भी मैंने अपने स्तर पर पेंशनर्स को समस्या से राहत देने का प्रयास किया है। मेरा प्रयास रहता है कि सभी की समस्याओं का समाधान हो जाए। इसलिए मैंने 20 मार्च के बाद जल्द ही दूसरा शिविर में 20 मई को ही लगवा दिया। वैसे नियम तो तीन माह में एक बार लगाने का है।
– पूनम मेहता, अतिरिक्त निदेशक (पेंशन), कोटा