13 साल.....16 करोड़.....हुआ बर्बाद, प्रशासन का आया ज्ञान ! पिथौरागढ़ का इंजीनियरिंग कॉलेज पुरानी जगह हुआ शिफ्ट


हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. तस्वीरों में जिसे आप देख रहे हैं यह है पिथौरागढ़ का एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन, और इसे बनाने में 16 करोड़ खर्च किया है किया गया है फिलहाल यहां न कोई छात्र हैं और न ही इसका कोई पालनहार . करोड़ों रुपये किस तरह बहाए जाते हैं ये इसका जीता जागता उदाहरण हैं. अब बात करते हैं कि आखिर इसकी यह हालत हुई कैसे?

दरअसल सीमांत जिले पिथौरागढ़ में 13 साल पहले शुरू हुए इंजीनियरिंग कॉलेज का उस समय जिसका अपना कोई भवन नहीं था और यह जीआईसी स्कूल के भवन में संचालित किया जाता था, जिसे देखते हुए 16 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई और और इसका काम शुरू हुआ, जब यह बन गया यहां कक्षाएं संचालित भी हुई लेकिन यह शहर से 12 किलोमीटर दूर मढ़ धुरा के एकांत जंगलों के बीच होने और भूस्खलन के खतरे की बातें आने लगी जिस कारण एक बार फिर इंजीनियरिंग कॉलेज वापस स्कूल के भवन में शिफ्ट हो गया.

फिर चर्चा में पिथौरागढ़ का इंजीनियरिंग कॉलेज
अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े कॉलेज का निर्माण करने से पहले ये बातें क्यों नहीं सोची गयी? निर्माण एजेंसियों और प्रशासन को जब यहां निर्माण नहीं हुआ था तब यह कमियां नजर क्यों नहीं आयी? करोड़ों रुपये बर्बाद करने की आखिर जरूरत क्या थी?  इन सवालों की वजह से पिथौरागढ़ का इंजीनियरिंग कॉलेज जो पहले से विवादों में रहा है चर्चा का विषय बना हुआ है.

ठगा हुआ महसूस कर रहें ग्रामीण
क्षेत्रीय विधायक मयूख महर ने इंजीनियरिंग कॉलेज भवन को भ्रष्टाचार की जिंदा मिसाल बताया है और कहा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की गलत नीतियों के कारण यहां सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है. जिन ग्रामीणों ने गांव की भूमि क्षेत्र के विकास के लिए दान में दी आज वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन की ये स्थिति देखकर सवाल उठना तो लाजमी है ही क्योंकि पिथौरागढ़ में विकास के नाम पर किस तरह सरकारी धन का दुरूपयोग किया जाता है यह जगजाहिर हो गया है.

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FIRST PUBLISHED : August 31, 2023, 12:40 IST

By admin

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