इस स्कूल में बना छोलिया डांस का सबसे युवा ग्रुप ! छात्रों ने उठाया संस्कृति को आगे बढ़ाने का जिम्मा


हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. उत्तराखंड का जाना-माना पारंपरिक डांस है छोलिया.जिसकी डिमांड आजकल विशेष आयोजनों में काफी ज्यादा बढ़ने लगी है. छोलिया डांस उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में देखने को मिलता है जो प्राचीन समय से चले आ रहा है. एक समय ऐसा भी आ गया था कि इस विधा को लोग भूलने लगे थे और छोलिया डांस का प्रभाव कम हो गया था . छोलिया डांस को आगे बढ़ाने के तमाम प्रयास हुए जिसका असर यह हुआ कि आज छोलिया डांस अपने अस्तित्व में आ गया है और अब नई पीढ़ी भी इस डांस को सीख रही है.

हम बात कर रहे हैं जीआईसी भड़कटिया के छात्रों की जिनका अपना छोलिया दल है और यह दल छोलिया डांस का प्रदर्शन कर सभी से खूब वाहवाही लूट रहा है. इस दल में 8 छात्र शामिल हैं. जो डांस करने के साथ ही यहां के पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बजाने में भी काफी निपुण हैं. जीआईसी भड़कटिया के स्कूल पढ़ने वाले इन छात्रों का अपनी संस्कृति के प्रति लगाव ही इन्हें इस डांस की ओर खींच लाया. जो आज पिथौरागढ़ के सबसे कम उम्र के छोलिया डांसरों में शामिल हैं.

छोलिया डांस के माध्यम से संस्कृति को बचाने का प्रयास
इस ग्रुप में शामिल छात्र हिमांशु बताते हैं कि इसकी शुरुआत उनके स्कूल से हुई जहां इस डांस को कर सकने में सक्षम लोगों की एक टीम बनाई गई. जिसके बाद अनेक आयोजनों में उन्होंने छोलिया डांस का प्रदर्शन भी किया . इसके माध्यम से वे सभी अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं एक और छात्र विनीत पांडे का कहना है कि छोलिया डांस जो उत्तराखंड की संस्कृति है उसे वह छोलिया डांस के माध्यम से प्रसारित करने का काम करते हैं.

काबिले तारीफ हैं छात्रों का जोश
अक्सर देखा जाता है कि छोलिया डांस करने के लिए नई पीढ़ी दूर ही रहती है लेकिन इन छात्रों का अपनी संस्कृति के प्रति जोश और जुनून वाकई काबिले तारीफ है. जिन्होंने कम उम्र में ही इस विधा को सीखकर समाज में अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का एक संदेश भी दिया है.

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FIRST PUBLISHED : August 30, 2023, 13:02 IST

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