पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पहाड़ों में सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छिपी नहीं है. साल दर साल पहाड़ों में सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर होने के बजाय गर्त में ही जा रही है. बात पिथौरागढ़ जिले की करें तो यहां कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के लिए ग्रामीण अब अनशन करने को भी मजबूर हो रहे हैं.
इन दिनों धारचुला के गांव जुम्मा के ग्रामीण पिछले एक हफ्ते से क्रमिक अनशन में बैठे हैं वजह है यहां राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी, जिनकी नियुक्ति की मांग यहां के लोग लंबे समय से करते आए हैं. लगातार मांगों को अनदेखा होते देख यहां के अभिवावकों को अब क्रमिक अनशन का सहारा लेना पड़ा है, जिसमें गांव की महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे सभी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. मांगें पूरी नहीं होने तक इस आंदोलन को बरकरार रखने की बात यहां के स्थानीय लोग कर रहे हैं.
जरूरी विषयों की नहीं होती पढ़ाई
दरअसल राजकीय इंटर कॉलेज जुम्मा में सहायक अध्यापक के 7 पद स्वीकृत हैं जिसमें से सिर्फ हिंदी और व्यायाम के शिक्षक ही यहां तैनात हैं. वहीं प्रवक्ता संवर्ग में 9 पदों के सापेक्ष सिर्फ 1 विषय अर्थशास्त्र के ही टीचर नियुक्त हैं, अन्य दो विषयों हिंदी और इतिहास पर अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं. अब ऐसे में छात्र महत्वपूर्ण विषयों गणित, विज्ञान की पढ़ाई से वंचित ही चल रहे हैं जो कहीं न कहीं उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
20 छात्रों ने मजबूरी में छोड़ा स्कूल
यह स्थिति तब है जब विद्यालय में छात्रों की संख्या भी 264 है. टीचर नहीं होने से अभी तक 20 छात्रों ने यहां से नाम कटवा लिया है और शहरों के स्कूलों में अपना एडमिशन कराने को मजबूर हैं. आंदोलन कर रहे छात्रों के परिजनों ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह आमरण अनशन भी शुरू करेंगे.
जिले से शिक्षकों के हुए बंपर तबादले
जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया से जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि धारचुला और मुनस्यारी विकासखण्ड से शिक्षकों के काफी ट्रांसफर हुए हैं जिस वजह से यह समस्या सामने आई है. उन्होंने इस विषय को शिक्षा निदेशालय को अवगत कराने और पिथौरागढ़ में टीचरों की जल्द नियुक्ति का आश्वासन निदेशालय से मिलने की बात कही है.
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FIRST PUBLISHED : August 3, 2024, 15:41 IST
