8km पैदल…बीच में जंगली जानवरों से खतरा; छात्रों ने बताया दर्द, कहा- Plzz हमारे गांव में स्कूल खोल दो


हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़: जनपद पिथौरागढ़ के विकासखंड मुनस्यारी के गांव जोशा, गांधीनगर में स्कूली बच्चे इस कदर मजबूर हो चुके हैं कि वह अब आगे की पढ़ाई नहीं करना चाहते. वजह भी जायज है, क्योंकि पांचवी के बाद उन्हें 4 किलोमीटर दूर जंगलों के रास्ते दूसरे स्कूल पहुंचना होगा.

आगे की पढ़ाई के लिए इन छात्रों को 8 किलोमीटर दूर जंगलों के रास्ते जाना पड़ेगा. मुनस्यारी के इस गांव में सिर्फ पांचवी तक के लिए स्कूल है, जहां इस सत्र में 7 बच्चे पास हुए हैं. अब आगे की पढ़ाई के लिए इन्हें दूसरे गांव में जाना पड़ेगा, जो 4 किलोमीटर जंगलों का दुर्गम रास्ता है. 4 किलोमीटर ढलान में उतरना और वापस 4 किलोमीटर आने-जाने में ही बच्चों का पूरा समय बीत जाएगा. वहीं जंगली जानवरों से खतरा भी बना हुआ है, जिसके डर की वजह से अब यह बच्चे दूसरी जगह स्कूल पढ़ने नहीं जा रहे हैं. इन्होंने अपना दर्द लोकल 18 के साथ साझा किया है.

गरीब अभिभावक भी हुए मजबूर
इन बच्चों के अभिभावक मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. अभिभावकों के सामने भी अब समस्या खड़ी हो गई है, जिन्होंने अपना दर्द लोकल 18 के साथ साझा करते हुए कहा कि वह इतने सक्षम नहीं हैं कि दूसरी जगह रहकर अपने बच्चों को पढ़ा सके. सभी ने सरकार से गुजारिश की है कि उनके गांव में ही जूनियर हाई स्कूल खोला जाए. ताकि, उनके बच्चे  शिक्षा के अधिकार से वंचित न हो.

समस्याओं को किया गया दरकिनार
यहां के ग्राम प्रधान राजेश रोशन ने जानकारी देते हुए बताया कि गांधीनगर जूनियर हाई स्कूल सभी मानकों को पूरा कर रहा है. वह लगातार इस संबंध में प्रशासन और विभाग के चक्कर पिछले कई सालों से काटते आए हैं. लेकिन, अभी तक उनकी इस समस्या को दरकिनार ही किया गया है. अब नौबत यह आ गई है कि बच्चे स्कूल ही नहीं जा रहे हैं.

कैसे होगा बच्चों का भविष्य उज्जवल?
उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने के मकसद से खोले गए सरकारी स्कूलों का हाल बहुत बुरा है, जिनको सुधारने के लिए एक बड़ा विभाग काम कर रहा है. लेकिन हालात बद से बत्तर हैं. कंपटीशन के इस जमाने में जब बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा ही पूरी नहीं हो पाएगी, तो वह कैसे अपने भविष्य को उज्जवल बनाएंगे. यह सोचने वाली बात है.

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