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पिथौरागढ़ में खुली भूगोल की पहली लैब, पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल से सीखेंगे छात्र
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में अब छात्र भूगोल की पढ़ाई करने के साथ प्रैक्टिकल के जरिए भी विषय की बारीकियां सीख सकेंगे. जिले में भूगोल की पहली प्रैक्टिकल लैब डाइट डीडीहाट में स्थापित की गई है, जो यहां छात्रों को भूगोल के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद करेगी, साथ ही विषय के सभी टॉपिक को छात्र प्रैक्टिकल के माध्यम से आसानी से समझ सकेंगे. जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट में भूगोल की पहली लैब स्थापित हुई है, जो जिले के सभी स्कूलों के छात्रों के लिए खुली है. यहां पहले टीचरों को भूगोल के प्रैक्टिकल की ट्रेनिंग दी जा ... Read more
पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते डॉक्टर? 110 पदों पर इंटरव्यू, 10 पहुंचे, 2 जॉइन करेंगे
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में बेस अस्पताल को शुरू हुए डेढ़ साल से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन अभी भी इसके हालात सुधर नहीं पाए हैं. एक तरफ जहां जिला अस्पताल में हर रोज रोगियों की भीड़ उमड़ रही है, तो करोड़ों की लागत से बना बेस अस्पताल सुनसान पड़ा है. ओपीडी की बात करें तो जिला अस्पताल में हर रोज 800 से अधिक रोगी पहुंच रहे हैं, तो बेस अस्पताल में औसतन 10 से 15 रोगी ही बामुश्किल पहुंच रहे हैं. हाल में ही अस्पताल के लिए 110 पदों पर इंटरव्यू हुए थे लेकिन मात्र ... Read more
आजादी के बाद से सड़क के इंतजार में गांव, डोली ही गांववालों का सहारा
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आज भी कई ग्रामीण इलाकों में सड़क नहीं पहुंच पाई है. बरसात के इस मौसम में पैदल रास्तों की भी स्थिति खराब हो चुकी है. यहां आजादी के बाद से ही अभी तक कई गांव सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं. सड़क न जुड़ पाने से ग्रामीण विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं. आज हम बात कर रहे हैं धारचूला विधानसभा की बंगापानी तहसील के मैथली गांव की, जो आज तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है. इस कारण इस क्षेत्र की 2000 से ज्यादा की आबादी को खासी दिक्कतों का सामना करना ... Read more
गजब! 21वीं सदी में बच्चों को विज्ञान की पढ़ाई नसीब नहीं, गांव छोड़ने को मजबूर
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पहाड़ों में सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छिपी नहीं है. साल दर साल पहाड़ों में सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर होने के बजाय गर्त में ही जाते रही है. बात पिथौरागढ़ जिले की करें, तो यहां कई स्कूलों में टीचरों की भारी कमी है, जिसके चलते कई गांव पलायन करने को भी मजबूर हो गए हैं. आज हम राजकीय इंटर कॉलेज सल्ला चिंगरी की बात कर रहे हैं, जहां इंटरमीडिएट में विज्ञान विषय का संचालन ही नहीं होता है, जिस कारण परिजन अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. ... Read more
खुद का भविष्य बचाने आगे आए पहाड़ के बच्चे, सरकार की यह मांग
पिथौरागढ़: कहते हैं कि शिक्षा और शिक्षक समाज को आगे बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों में बिना शिक्षक के हीं छात्रों की पढ़ाई चल रही है. परेशान छात्र अब खुद अपने भविष्य को बचाने आगे आएं हैं. अब ऐसे में छात्रों का भविष्य कैसे बनेगा? ये सोचने वाली बात है. दरअसल, उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी इलाकों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकारी स्कूल खोले गए. समय के साथ इन स्कूलों के माहौल भी बेहतर होते जाना था, लेकिन हुआ इसका उल्टा. धीरे-धीरे पहाड़ के सरकारी स्कूलों के हालत खस्ताहाल होते जा रहे हैं. ... Read more
बाजारों में आसानी से नहीं मिलते ये जंगली फल, स्वाद में गजब तो सेहत में अति उत्तम
03 यह पहाड़ी फल कुमाऊं में घिंगारु, गढ़वाली में घिंघरु और नेपाली में घंगारू के नाम से मशहूर है. छोटे-छोटे लाल सेव जैसे दिखने वाले घिंघरु के फलों को हिमालयन रेड बेरी, फायर थोर्न एप्पल या व्हाइट थोर्न भी कहते हैं. जबकि इसका वानस्पतिक नाम पैइराकैंथा क्रेनुलाटा है. घिंघारू एक औषधीय पौधा है, जिसकी जड़ से लेकर फल, फूल, पत्तियां और टहनियां सभी हमारे लिए उपयोगी है. यह फल सिर्फ 3 माह जून, जुलाई और अगस्त के आसपास ही मिलता है. स्कूली बच्चे और गांव में जंगल जाने वाली महिलाएं इसे बड़े चाव से खाती हैं. घिंघारू के फलों को ... Read more
8km पैदल…बीच में जंगली जानवरों से खतरा; छात्रों ने बताया दर्द, कहा- Plzz हमारे गांव में स्कूल खोल दो
हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़: जनपद पिथौरागढ़ के विकासखंड मुनस्यारी के गांव जोशा, गांधीनगर में स्कूली बच्चे इस कदर मजबूर हो चुके हैं कि वह अब आगे की पढ़ाई नहीं करना चाहते. वजह भी जायज है, क्योंकि पांचवी के बाद उन्हें 4 किलोमीटर दूर जंगलों के रास्ते दूसरे स्कूल पहुंचना होगा. आगे की पढ़ाई के लिए इन छात्रों को 8 किलोमीटर दूर जंगलों के रास्ते जाना पड़ेगा. मुनस्यारी के इस गांव में सिर्फ पांचवी तक के लिए स्कूल है, जहां इस सत्र में 7 बच्चे पास हुए हैं. अब आगे की पढ़ाई के लिए इन्हें दूसरे गांव में जाना पड़ेगा, जो 4 किलोमीटर ... Read more
OMG! उत्तराखंड के 400 से अधिक स्कूलों में केवल एक टीचर, कई बंद होने की कगार पर
हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़: उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी सामने आई है. पिथौरागढ़ जिले की बात करें तो यहां ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जहां शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं. कुछ चंद स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी स्कूल बिना प्रधानाचार्य के चल रहे हैं. तो वहीं, सिर्फ एक टीचर के सहारे चलने वाले स्कूलों की संख्या भी काफी ज्यादा है. 439 स्कूलों में मात्र एक टीचरशिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले में 68 इंटरमीडिएट कॉलेज हैं. इनमें से लड़कियों के लिए 7 हैं. इसके अलावा ... Read more
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों के प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन की होड़…सरकारी विद्यालयों के हाथ खाली
हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सरकारी स्कूलों की दशा साल दर साल खराब होती जा रही है. इस समय स्कूलों में नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया चली हुई है. एक तरफ जहां प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए संस्थान अभिवावकों को रिझाने में लगे हुए हैं, तो वहीं सरकारी स्कूलों में लगातार एडमिशन की संख्या में गिरावट आ रही है. बात अगर पिथौरागढ़ जिले की करें तो यहां शहर के सरकारी स्कूलों में जहां एक समय कक्षा 6 में एडमिशन लेने के लिए भीड़ लगी रहती थी, वहां औसतन 10 बच्चे ही एडमिशन को पहुंच रहे हैं. ... Read more
गर्मियों में घूमने के लिए बेस्ट है घने जंगलों के बीच स्थित यह ताल, यहां स्नान के लिए आते थे इंद्र!
सोनिया मिश्रा/ रुद्रप्रयाग.धार्मिक तीर्थाटन हों या पर्यटन स्थल, आज उत्तराखंड ने दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग साख बना ली है. बेहतरीन ट्रेक, प्राचीन मठ-मंदिर और प्रकृति के सुंदर नजारों को अनुभव करने के लिए देश-विदेश से हर साल लाखों सैलानी उत्तराखंड पहुंच रहे हैं. हिमालय की विहंगम वादियों में स्थित रुद्रप्रयाग जिले का देवरिया ताल भी सैलानियों को खूब आकर्षित कर रहा है. यही कारण है कि गर्मियों के दिनों में यहां ट्रेकिंग करने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. रुद्रप्रयाग जनपद में देवरिया ताल एक सुंदर पर्यटक स्थल है, जो जिला मुख्यालय से करीब 49 किलोमीटर की दूरी ... Read more