उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों के प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन की होड़…सरकारी विद्यालयों के हाथ खाली


हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सरकारी स्कूलों की दशा साल दर साल खराब होती जा रही है. इस समय स्कूलों में नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया चली हुई है. एक तरफ जहां प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए संस्थान अभिवावकों को रिझाने में लगे हुए हैं, तो वहीं सरकारी स्कूलों में लगातार एडमिशन की संख्या में गिरावट आ रही है.

बात अगर पिथौरागढ़ जिले की करें तो यहां शहर के सरकारी स्कूलों में जहां एक समय कक्षा 6 में एडमिशन लेने के लिए भीड़ लगी रहती थी, वहां औसतन 10 बच्चे ही एडमिशन को पहुंच रहे हैं. ग्रामीण इलाकों की बात करें तो यहां भी हालात में सुधार नहीं है. सरकारी स्कूलों में शिक्षक और तकनीक के अभाव में छात्र पलायन करते जा रहे हैं.

200 स्कूलों में प्रधानाचार्य का पद खाली
जिले में 200 सरकारी स्कूलों में तो प्रधानाचार्य ही नहीं है और 300 से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली है. जिसका नतीजा ये रहा है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या भी 10 से कम पहुंच गई और सरकार को इन्हे बंद करने का फैसला लेना पड़ा.

सरकारी स्कूलों की बदहाली का कारण
जिले के समाजसेवी कुंडल चौहान ने इस विषय पर चिंता जाहिर करते हुए लोकल 18 से कहा कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था आज के समय के हिसाब से अपडेट नहीं है. एक तरफ जहां प्राइवेट स्कूल अपनी शिक्षण व्यवस्था को साल दर साल बढ़ाते जा रहे हैं, तो वहीं सरकारी स्कूलों में इस तरह का कोई बदलाव नजर नहीं आता. साथ ही शिक्षकों की भारी कमी भी सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का कारण है.

क्या बंद हो जाएंगे सरकारी स्कूल
आज के आधुनिक दौर में शिक्षा का काफी महत्व है. अभिवावकों को बेहतर शिक्षा प्राइवेट स्कूलों में दिखाई देती है, जहां दाखिला कराना उनकी मजबूरी बना हुआ है. प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा साल दर साल महंगी भी होते जा रही है. बावजूद इसके प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन काफी संख्या में हो रहे हैं. सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था में अगर जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ के सरकारी स्कूलों में ताले लटक जाएंगे.

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