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बाजारों में आसानी से नहीं मिलते ये जंगली फल, स्वाद में गजब तो सेहत में अति उत्तम

03 यह पहाड़ी फल कुमाऊं में घिंगारु, गढ़वाली में घिंघरु और नेपाली में घंगारू के नाम से मशहूर है. छोटे-छोटे लाल सेव जैसे दिखने वाले घिंघरु के फलों को हिमालयन रेड बेरी, फायर थोर्न एप्पल या व्हाइट थोर्न भी कहते हैं. जबकि इसका वानस्पतिक नाम पैइराकैंथा क्रेनुलाटा है. घिंघारू एक औषधीय पौधा है, जिसकी जड़ से लेकर फल, फूल, पत्तियां और टहनियां सभी हमारे लिए उपयोगी है. यह फल सिर्फ 3 माह जून, जुलाई और अगस्त के आसपास ही मिलता है. स्कूली बच्चे और गांव में जंगल जाने वाली महिलाएं इसे बड़े चाव से खाती हैं. घिंघारू के फलों को ... Read more

Nainital Tourist Spot: यहां जंगल के बीच में छिपा है खूबसूरत वॉटरफॉल, आपको पता है?

सीमा नाथ/नैनीताल. उत्तराखंड का नैनीताल जो हरी-भरी शांत वादियों में बसा है. सरोवर नगरी की सुकून देने वाली मनमोहक वादियां यहां आने वाले सैलानियों के मन को भा जाती हैं, जिस वजह से यह सैलानियों की फेवरेट डेस्टिनेशन में से एक है. वैसे तो नैनीताल में घूमने के लिए कई फेमस टूरिस्ट स्पॉट्स हैं, लेकिन अगर आप शहर की आपाधापी से दूर प्रकृति की गोद में सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो आप जंगल के बीचो बीच बसे नैनीताल के इस हिडन वॉटरफॉल पर आ सकते हैं. यह वॉटरफॉल नैनीताल के रातीघाट-गरमपानी पैदल मार्ग में स्थित है, जहां ... Read more

Haldwani: देश की पहली रामायण वाटिका में देख सकेंगे संजीवनी समेत 149 दुर्लभ वनस्पतियां

रिपोर्ट: पवन सिंह कुंवर हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में देश की पहली रामायण वाटिका बनाए जाने का दावा किया गया है. यह वाटिका देखने में जितनी सुंदर है, उतनी ही इस वाटिका में महत्वपूर्ण जानकारियां भी लोगों को मिल रही हैं. यह वाटिका पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. रामायण में भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा के दौरान वह जिन-जिन स्थलों और जंगलों से होकर गुजरे थे, वहां मिलने वाली वनस्पतियों का जिक्र रामायण में किया गया है. उन्हीं वनस्पतियों को हल्द्वानी स्थित वन अनुसंधान केंद्र में संरक्षित किया गया है, ताकि ... Read more