रिपोर्ट-हिमांशु जोशी
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िला मुख्यालय में कुओं और 27 जल स्रोतों का पानी पीने लायक नहीं है. इन सभी जल स्रोतों में कोलीफार्म बैक्टीरिया पाया गया है, जो सेहत के लिये बेहद खतरनाक माना जा रहा है. इसके अलावा नगर में पेयजल सप्लाई के लिए उपयोग किए जाने वाले 8 टैंकों में भी यह बैक्टीरिया पाया गया है. जिसके बाद जल संस्थान के भी होश उड़ गए.
दरअसल पिथौरागढ़ में पीलिया और पेट से सम्बंधित रोगों की बढ़ती संख्या और दूषित पानी पिलाये जाने की शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी ने शहर को सप्लाई होने वाले पानी के सैम्पल जांच के लिए भेजे थे, जिसमें कोलीफार्म बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई है. जिसके बाद जल संस्थान ने आनन फानन में सभी 32 टैंकों की सफाई कर क्लोरीनेशन कर दिया. जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सुरेश जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी टैंकों की सफाई कर ली गई है. जिसके बाद शहरवासियों को स्वच्छ जल सप्लाई किया जा रहा है.
सप्लाई टैंकों में कोलीफार्म पाये जाने के बाद जल संस्थान ने पिथौरागढ़ नगर के कुओं और 27 नौले, धारों के पानी की जांच की. जांच में सभी जल स्रोतों में कोलीफार्म बैक्टीरिया मिला है. इसकी मात्रा न्यूनतम 13.2 से अधिकतम 2419 एमपीएन तक है, जिसका मतलब होता है कि यह पानी सीधे पीने योग्य नहीं है. जल संस्थान ने लोगों के निजी कुओं के पानी की जांच भी की, जिसका भी पानी पीने लायक नहीं पाया गया.
पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के मुख्य फिजीशियन डॉ. एसएस कुंवर के अनुसार, कोलीफार्म बैक्टीरिया से कोलाइटिस सहित अन्य पेट संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है. उन्होंने बताया कि यह बैक्टीरिया पेट के अच्छे बैक्टीरिया को रिप्लेस कर देता है, जिससे टाइफाइड और पीलिया की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही कोलीफार्म बैक्टीरिया मिट्टी या मिट्टीयुक्त पानी की सतह पर पाया जाता है. इससे पानी प्रदूषित हो जाता है. जिला अस्पताल के फिजीशियन ने लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी है.
पिथौरागढ़ के जिन नौलों और धारों के पानी जांच हुई, उनमें महादेव धारा, पंडा धारा, चिमस्यानौला, टकाना खड़ीगली नौला, शिवालया मंदिर, पपदेव धारा, धनौड़ा निकट मंदिर, विवेकानंद निचला नौला, विवेकानंद ऊपर नौला, रई धारा, रई नौला पंप के पास, डॉनबास्को स्कूल धारा, घुपौड़ नौला, जाखनी नौला ओली भवन के पीछे, जाखनी नौला द्वितीय, लिंठ्यूड़ा धारा, मल्ली दौला नौला, नियर बीआरसी नौला, नियर नीलकंठ धारा, पांडेगांव नौला शनि मंदिर, कुजौली नौला, खड़कोट नौला, लिंठ्यूड़ा नौला टीचर कॉलोनी, हुड़ेती नौला, ऐंचोली धारा शिव मंदिर के निकट, आरएफसी गोदाम धारा, हनुमान मंदिर फिलिंग पंप के निकट, इन सभी धारों में यह बैक्टीरिया पाया गया है.
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Tags: Pithoragarh news, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : January 11, 2023, 16:35 IST
