Dehradun News: ब्रिटिश सेना की छावनी से मशहूर मार्केट में तब्दील हुआ था पलटन बाजार, जानें इतिहास और खासियत


रिपोर्ट- हिना आज़मी

देहरादून. अगर कोई उत्तराखंड की राजधानी देहरादून घूमने आए और पलटन बाजार (Paltan Bazaar Dehradun) न देखा तो क्या देखा? यकीनन देहरादून के स्थानीय निवासियों के अलावा बाहर से आने वाले लोगों के लिए भी पलटन बाजार आकर्षण का केंद्र है. मजेदार बात यह है कि यह दिल्ली के बाजारों की तरह ही मशहूर है. आज हम आपको बताएंगे कि इसे पलटन बाजार क्यों कहा जाता है और इसका क्या इतिहास है.

स्थानीय निवासी और जानकार मनीष कुमार ने बताया कि इस बाजार का नाम पलटन बाजार इसलिए पड़ा क्योंकि यहां ब्रिटिश सेना की बटालियन (पलटन) गुजरती थी. उन्होंने बताया कि पलटन बाजार में स्थित गांधी स्कूल से उन्होंने पढ़ाई की और आज भी वह पलटन बाजार से गुजरते हैं, तो अपने पुराने दिन याद करते हैं. हालांकि पलटन बाजार अब बहुत बदल गया है.

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पलटन बाजार में स्थित साल 1948 से चली आ रही घड़ी की दुकान के मालिक अजय बहल का कहना है कि उनके दादा ने यह दुकान शुरू की थी. वह बचपन से पलटन बाजार में ही आते-जाते लोगों को देखते थे. पुराने वक्त से अब तक पलटन बाजार में लोगों की भीड़ कम नहीं हुई है क्योंकि पलटन बाजार ही एक ऐसा बाजार है, जहां जरूरत का हर सामान हर दाम में मिलता है. इसके अलावा 87 वर्षीय भीम चंद विरमानी ने बताया कि वह आज पलटन बाजार को जैसा देख रहे हैं वह पहले बिल्कुल ऐसा नहीं था. उन्होंने बताया कि पहले पलटन बाजार था और उसके बाद घंटाघर बनवाया गया, जिसके पीछे पोस्ट ऑफिस हुआ करता था. पलटन बाजार की कई दुकानें आज भी बहुत मशहूर हैं, जहां लोग दूर-दूर से आते हैं.

क्या है पलटन बाजार का इतिहास?
अंग्रेजी शासनकाल में साल 1822 में सहारनपुर रोड के माध्यम से उत्तर प्रदेश और देहरादून को जोड़ने का रास्ता मिला. इसके बाद गढ़वाल और मसूरी तक पहुंचने के लिए यातायात व्यवस्था को इस तरह बनाया गया कि सहारनपुर मार्ग से धमावाला बाजार और राजपुर गांव पहुंचा जा सके. इसी बीच साल 1864 में मुख्य मार्ग के पास ब्रिटिश शासकों की ओल्ड सिरमौर बटालियन की छावनी बनाई गई. यहां सैनिकों के आवासीय स्थल थे, जहां बटालियन रहा करती थी. अंग्रेजों की सिरमौर बटालियन और गोरखा बटालियन के अधिकारियों और सेना के लिए यहां बाजार बनाया गया. यहां घोसी गांव भी हुआ करता था, जिसमें स्थानीय लोग पशु पालते थे. आज पलटन बाजार का यह गांव घोसी गली के नाम से जाना जाता है.

बताया जाता है कि साल 1935 तक यहां कुछ ही दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तो लोग यहां आकर बसे और पलटन बाजार बड़ा रूप लेने लगा. पलटन बाजार के पास एक घंटाघर बनवाया गया. बताया जाता है कि जहां घंटाघर है, उससे पहले वहां पानी की बड़ी-बड़ी दो टंकियां हुआ करती थीं, जहां से सेना के लिए पानी भेजा जाता था. इसके अलावा उस चौक पर ही तांगा स्टैंड हुआ करता था, जहां से राजपुर गांव के लिए जाया जाता था. इस मार्ग को आज राजपुर रोड कहा जाता है.

ब्रिटिश काल से आज तक पलटन बाजार का रूप बहुत बदल गया है. स्मार्ट सिटी के तहत सरकार पलटन बाजार के सौंदर्यीकरण के लिए काम कर रही है. पलटन बाजार में नए कॉम्प्लेक्स और दुकानें भी बनाई गई हैं, लेकिन आज भी पुराना इलाहाबाद बैंक, घंटाघर, पंजाब नेशनल बैंक व यहां की अन्य पुरानी इमारतें अपना इतिहास बयां करती हैं.

Tags: British Government, Dehradun news, Uttarakhand news

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