सोनिया मिश्रा/चमोली: जिन्दगी में कुछ करने का जुनून और मजबूत इरादे हों, तो कोई भी बाधा आपको आपके सपनों को पाने से रोक नहीं सकती. इसकी मिसाल उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लॉक के वाण गांव की भागीरथी बिष्ट पेश कर रही हैं. जीवन में तमाम मुश्किलों को पार कर भागीरथी वॉक रेस में अपनी अलग छाप छोड़ रही हैं. राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर वॉक रेस में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी भागीरथी को ‘फ्लाइंग गर्ल’ के रूप में प्रसिद्धि मिल रही है. और अब वह भारत को वॉक रेस में ओलंपिक मेडल दिलाने का सपना देख रही हैं. भागीरथी को संघर्ष विरासत में मिला, जब वह तीन साल की थी. तब उनके पिता की मृत्यु हो गई. इस कारण भागीरथी के पूरे परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा. उन्होंने जैसे तैसे परिस्थियों से लड़कर होश संभाला और हार नहीं मानी. भागीरथी पढ़ाई के साथ साथ घर का सारा काम खुद करती थीं. यहां तक कि अपने खेतों में हल भी खुद ही चलाया करती थी.
फ्लाइंग गर्ल भागीरथी की प्रतिभा को सबसे पहले वाण गांव के राजकीय इंटर कॉलेज के शिक्षकों ने पहचाना. स्कूल में भागीरथी कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स में हमेशा अव्वल रहती. स्कूल के सभी शिक्षकों ने भागीरथी को प्रोत्साहित किया और हौसला बढ़ाया. इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य गजेन्द्र अग्निहोत्री कहते हैं कि भागीरथी में ओलंपिक खेलों में पदक जीतने की क्षमता है.
‘सिरमौरी चीता’ सुनील शर्मा बने गुरु
अंतरराष्ट्रीय एथलीट और ग्रेट इंडिया रन फेम सुनील शर्मा, जिन्हें सिरमौरी चीता भी कहा जाता है. उत्तराखंड में ऊंची पर्वतमाला पर प्रैक्टिस करने के उद्देश्य से वाण गांव आए थे. यहीं उनकी मुलाकात भागीरथी से हुई. वाण गांव से भागीरथी ने महज 36 घंटे में सबसे कठिन रोंटी रूट को बिना रुके और बिना संसाधनों के नाप कर एक रिकॉर्ड बनाया. सुनील शर्मा भागीरथी की क्षमता और प्रतिभा के कायल हो गए और अपने साथ नाहन चलने एवं प्रैक्टिस कराने का प्रस्ताव रखा तो भागीरथी को विश्वास ही नहीं हुआ. सुनील शर्मा अपने मार्गदर्शन में भागीरथी को तराशना चाहते हैं. ताकि वह देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतने में सफल हो सके.
11 किमी की लिडरवेट ट्रेल मैराथन में प्रथम स्थान
भागीरथी की ट्रेनिंग और संघर्ष का नतीजा अब और बेहतर दिखने लगा है. पिछले वर्ष भागीरथी बिष्ट ने जवाहरलाल नेहरू माउंटिनेटिंग इंस्टीट्यूट-विंटर स्कूल और कश्मीर टूरिज्म की ओर से आयोजित 11 किलोमीटर की लिडरवेट ट्रेल मैराथन में प्रथम स्थान प्राप्त किया. 7 से 9 हजार फीट की ऊंचाई पर 11 किलोमीटर की लिडरवेट ट्रेल रेस को उन्होंने एक घंटा 12 मिनट में पूरा किया. उनके गुरु सुनील ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि भागीरथी की परफॉर्मेंस में लगातार सुधार आ रहा है. और जल्द वह देश के लिए ओलंपिक में प्रतिभाग करने और गोल्ड मेडल जीतने का सपना भी पूरा करेंगी.
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FIRST PUBLISHED : February 27, 2024, 14:12 IST
