हिना आज़मी/ देहरादून. राजस्थान की लोक कला में कठपुतली का बहुत महत्व है. इसलिए माना जाता है कि राजस्थान की कठपुतली बहुत ही मशहूर है, लेकिन उत्तराखंड के दान सिंह फर्त्याल अपनी पत्नी पुष्पा के साथ मिलकर पहाड़ की लोककला और लोक संस्कृति कठपुतली के जरिये लोगों तक पहुंचा रहे हैं. अल्मोड़ा के रहने वाले दान सिंह फर्त्याल उत्तराखंड के कुमाऊं की संस्कृति को दूसरे राज्यों तक में अपनी इस बेहतरीन कला के जरिये पहुंचाने का काम कर रहे हैं. इसके अलावा उनकी पत्नी पुष्पा भी उनका बखूबी साथ निभा रही हैं.
जिंदगी के संघर्ष से लड़े दान सिंह फर्त्याल
लोकल 18 को जानकारी देते हुए दान सिंह फर्त्याल ने बताया कि बचपन से ही उनके एक पैर में दिक्कत थी. जिसके चलते वह ठीक से चल नहीं पाते थे. स्कूल के दिनों में उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. सहपाठियों के व्यवहार से वह परेशान हो जाया करते थे. उनका बचपन से ही कला में बहुत रुझान था. इसीलिए वह कुछ नया करने की सोचते रहते थे. पुष्पा से उनका विवाह हुआ. एक बार वह लखनऊ में गए, वहां उन्होंने कठपुतलियों का नाटक देखा और फिर उनके दिमाग में यही आइडिया क्लिक कर गया. क्योंकि उत्तराखंड कठपुतली नहीं बनाई जाती है. आज दान सिंह अपनी पत्नी पुष्पा के साथ मिलकर कुमाऊं परिधान वाली महिलाएं और पुरुषों की कठपुतली बनाते हैं. इन कठपुतलियों को लेकर वह न सिर्फ उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में जाते हैं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में भी जाते हैं और उत्तराखंड के पहाड़ की संस्कृति को दर्शाते हैं.
वह छोलिया नृत्य की पौशाक और वाद्य यंत्रों के साथ कठपुतली तैयार करते हैं जो लोगों को आकर्षित करते हैं. वहीं कुमाऊँ क्षेत्र की महिलाएं जिस तरह से वेशभूषा धारण करती हैं. उसी की तर्ज पर महिलाओं की कठपुतलियां भी तैयार करते हैं, जो पिछौड़ा, नथ, घाघरा, लहंगा और आंगड़ी जैसी चीजों को पहनती हैं. दान सिंह फर्त्याल पिछले 15 सालों से इस काम में जुटे हुए हैं और इसके अलावा वह लोकगीत भी गाते हैं और अपना ‘Faag rang manch’ के नाम सेयूट्यूब चैनल को भी चला रहे हैं. दान सिंह फर्त्याल उत्तराखंड की संस्कृति की धरोहर को बचाने का काम तो कर ही रहे हैं बल्कि वह दूसरे दिव्यांगजनों को भी प्रेरित करने का काम कर रहे हैं.
जीवन संगिनी पुष्पा फर्त्याल भी बखूबी निभा रहीं हैं साथ
दान सिंह फर्त्याल की पत्नी पुष्पा फर्त्याल भी उनका बखूबी साथ निभा रहीं हैं. वह उनके साथ इन कठपुतलियों को बनाने का काम करती हैं. उन्होंने बताया कि हम गत्तों और अखबारों को घोलकर फिर सांचों की मदद से मुखोटे बनाते हैं और उनको सुखाते हैं फिर उसके बाद उन पर रंग करते हैं और फिर उन्हें कुमाऊं की वेशभूषा के साथ तैयार करते हैं. ज्यादा जानकारी के लिए आप 7500616349 पर सम्पर्क कर सकते हैं.
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FIRST PUBLISHED : March 25, 2024, 15:37 IST
