रिपोर्ट: हिमांशु जोशी
नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल के तल्लीताल में शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज स्थित है . इसकी स्थापना का श्रेय प्रतिष्ठित शिक्षा प्रेमी बाबू कृष्टोदास और प. वाचस्पति पंत को जाता है. इस इंटर कॉलेज की स्थापना साल 1899 में ‘डायमंड जुबली’ नाम से हुई थी. स्थापना से लेकर अभी तक इस विद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा है. क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के मशहूर पहाड़ी गीत ‘बेड़ू पाको बारमासा’ गीत को पहली बार इसी इंटर कॉलेज में गाया गया था.
1899 से 1900 तक इस विद्यालय का संचालन अयारपाटा में हुआ. साल 1910 में इसे राजकीय विद्यालय घोषित किया गया. साल 1924 में विद्यालय का स्थानांतरण अयारपाटा से वर्तमान के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के भवन में हुआ, जहां यह 1946 तक संचालित रहा.
साल 1953 में बालकों के लिए 10वीं तक की कक्षाएं गोरखा लाइन और 12वीं तक की कक्षा डीएसबी महाविद्यालय के परिसर में संचालित हुईं. साल 1976 में राजकीय इंटर कॉलेज नैनीताल नियमित रूप से अपनी वर्तमान जगह पर संचालित होता रहा है. 5 नवंबर 2008 से इस इंटर कॉलेज का नाम कारगिल युद्ध में शहीद मेजर राजेश अधिकारी के नाम पर रख दिया गया. शहीद मेजर राजेश अधिकारी इसी स्कूल के पूर्व छात्र भी रहे थे. उनको महावीर चक्र भी मिला था.
इस इंटर कॉलेज में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता अमित कुमार ने बताया कि यहां से पढ़े कई छात्र आज अपने-अपने क्षेत्र में काफी ऊंचे पदों पर हैं. विद्यालय में पढ़ाई कर चुके छात्रों में पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी वर्तमान में अंडमान एंड निकोबार के उपराज्यपाल पद पर कार्यरत हैं. यहां के पूर्व छात्र और इस विद्यालय के पूर्व प्रवक्ता हेमंत सिंह बिष्ट और आरएस बिष्ट को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.
‘बेड़ू पाको बारमासा’ भी बना पहचान
साल 1952 में उत्तराखंड के मशहूर पहाड़ी गीत ‘बेड़ू पाको बारमासा’ गीत को पहली बार इसी इंटर कॉलेज में गाया गया था, जिसे सुनने वालों से काफी समर्थन भी मिला और आज इस गाने को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है. इस इंटर कॉलेज को कई बार इंटर स्कूल गोल्फ टूर्नामेंट में गवर्नर्स कप भी हासिल हुआ है. इंटर स्कूल के वर्तमान प्रिंसिपल आरएस अधिकारी ने बताया कि वैसे तो इस इंटर कॉलेज का इतिहास काफी बेहतरीन रहा है हालांकि इसकी वर्तमान स्थिति अब काफी खराब हो गई है. बलियानाला के भूस्खलन वाले क्षेत्र के बिल्कुल ऊपर यह विद्यालय स्थित है. बरसात के दौरान यहां एडमिशन की प्रक्रिया होती है. हालांकि उस दौरान बलियानाला और यहां होने वाले भूस्खलन की खबर सुनने के बाद यहां छात्र एडमिशन के लिए आते ही नहीं हैं. हालत यह है कि जिस विद्यालय में कभी दो हजार के करीब छात्र पढ़ते थे, आज वहीं कुल 130 छात्र पूरे विद्यालय परिसर में पढ़ते हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|
Tags: Kargil war, Nainital news, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : December 05, 2022, 11:33 IST
