GIC Almora: सुमित्रानंदन पंत-मुरली मनोहर जोशी समेत कई दिग्‍गज रहे हैं एलुमनी, शानदार इतिहास


रिपोर्ट- रोहित भट्ट

अल्मोड़ा. उत्तराखंड के अल्मोड़ा में राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना ब्रिटिशकाल में साल 1889 में हुई थी. यह इंटर कॉलेज अल्मोड़ा के ऐतिहासिक भवनों में भी गिना जाता है. जबकि इस कॉलेज को ‘अटल उत्कृष्ट विद्यालय’ का भी दर्जा दिया गया है.

वहीं, राजकीय इंटर कॉलेज से पढ़े छात्रों ने अल्मोड़ा ही नहीं बल्कि उत्तराखंड और भारत का नाम रोशन किया है. इस स्कूल से कई आईएएस-पीसीएस अधिकारी, कवि, निजी संस्थानों में पदस्थ अधिकारी और राजनेता पढ़ चुके हैं. हालांकि इन दिनों यह स्‍कूल आर्थिक मदद गुहार लगा रहा है.

ये दिग्‍गज रहे हैं राजकीय इंटर कॉलेज के छात्र

वर्तमान में राजकीय इंटर कॉलेज में 40 शिक्षक हैं और करीब 700 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. अल्मोड़ा के राजकीय इंटर कॉलेज से पूर्व जनरल बीसी जोशी, आईएएस कमलेश पंत, पीसीएस सुमेध शर्मा, पूर्व राज्यपाल बीडी पांडे, मशहूर कवि सुमित्रा नंदन पंत, जनसंघ के संस्थापक सदस्य सोबन सिंह जीना, बीजेपी के दिग्गज नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी, अल्मोड़ा के मौजूदा सांसद अजय टम्टा और वर्तमान में विधायक मनोज तिवारी के अलावा कई जानी-मानी हस्तियां पढ़ाई कर चुकी हैं.

राजकीय इंटर कॉलेज के छात्र योगेश मेहरा ने कहा, ‘उन्हें यह जानकर बहुत अच्छा महसूस होता है कि उनका स्कूल देश के कई बड़े पदों पर रहे अधिकारियों, वर्तमान में तैनात अफसरों, कवि और कई राजनेताओं की शैक्षणिक भूमि रहा है. इन सभी ने अल्मोड़ा और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है. यही बात उन्हें व अन्य छात्रों को भी प्रेरणा देती है.’ इसके साथ योगेश का भी सपना है कि वह बारहवीं के बाद NEET की तैयारी करें, ताकि डॉक्टर बनकर अपने शिक्षकों और अपने स्कूल का नाम रोशन कर सकें.

छात्र ललित जोशी ने कहा कि उन्हें भी गर्व होता है कि वह इस स्कूल में पढ़ रहे हैं. उनकी प्रेरणा से वह आगे बढ़ना चाहते हैं और वह भी अल्मोड़ा और उत्तराखंड का नाम आगे ले जाना चाहते हैं. भविष्य में उनका सपना है कि टीचर बनकर इसी स्कूल में पढ़ाएं.

राजकीय इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल ने कही ये बात

राजकीय इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल नंदन सिंह बिष्ट ने बताया कि स्कूल के सभी शिक्षक बच्चों की पढ़ाई का खास ख्याल रखते हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर साल बच्चे मेरिट में आएं. उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल में भौतिक संसाधनों की कमी है. अगले महीने वह यहां से पढ़ चुके लोगों की एक मीटिंग रखने जा रहे हैं, ताकि वे लोग स्कूल की आर्थिक मदद कर पाएं और स्कूल के प्रति अपना सम्मान व्यक्त कर सकें.

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