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जानें क्या है गढ़भोज, द्वारिका प्रसाद सेमवाल दशकों से चला रहे अभियान
देहरादून. आज भले ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कई तरह के व्यंजन परोसे जा रहे हैं लेकिन पहाड़ से जुड़े लोगों को गढ़भोज ही पसंद आता है. गढ़भोज की बात करें, तो जिन व्यंजनों को बनाने के लिए पहाड़ के उत्पादों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें गढ़भोज कहा जाता है. गढ़भोज अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल दो दशकों से इसके लिए काम कर रहे हैं. वह बच्चों और नई पीढ़ी को हमेशा उत्तराखंड के आंदोलन का नारा याद दिलाते हैं, ‘कोदा झंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड बनाएंगे’. आज उत्तराखंड के बनने के बाद मिलेट्स अभियान के साथ-साथ गढ़भोज अभियान ... Read more
पहाड़ी संस्कृति की अनूठी परंपरा है ‘गढ़भोज’, जानें कैसे और क्यों हुई शुरुआत?
देहरादून. उत्तराखंड बनने के बाद राज्य को एक अलग पहचान मिली है. वहीं, उत्तराखंड के खानपान को पहचान दिलाने के लिए गढ़भोज अभियान शुरू किया गया था. साल 2000 से गढ़भोज अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल लगातार पहाड़ी उत्पादों से युवा और बच्चों को जोड़कर पहाड़ी खानपान को मेनस्ट्रीम में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं. News 18 लोकल से बातचीत के दौरान द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि राज्य के पारंपरिक भोजन को पूरे देश में “गढ़भोज” के नाम से पहचान दिलाकर थाली का हिस्सा बनाने और आर्थिक मजबूती का जरिया बनाने के लिए हिमालय पर्यावरण जड़ी ... Read more