चंपावत हादसे के बाद शिक्षा विभाग अलर्ट, पिथौरागढ़ के 178 जर्जर स्कूलों में अब नहीं बैठेंगे बच्‍चे


रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के चंपावत में बाथरूम की छत गिरने से हुई छात्र की मौत के बाद शिक्षा विभाग अलर्ट हो गया है. जबकि सीमांत जिले पिथौरागढ़ में शिक्षा के मंदिरों की हालत लंबे समय से खराब है. जिले में 178 ऐसे विद्यालय हैं, जिनके भवन जर्जर हालत में हैं. इन भवनों को अब चिह्नित कर गिराया जाएगा. तब तक ऐसे विद्यालयों में छात्र पढ़ाई नहीं करेंगे. यही नहीं, पिथौरागढ़ जिले के सरकारी विद्यालय कई सालों से मरम्मत की राह देख रहे हैं. जनपद के विद्यालयों की हालत यह है कि कहीं छत से पानी टपक रहा है, तो कहीं फर्श और दीवारें टूटी हुई हैं. ऐसे स्कूलों में पठन-पाठन कार्य कराना विद्यालय प्रबंधन के लिए पहले भी चुनौती बना हुआ था और अब आए नए आदेश के बाद भी छात्रों को पढ़ाना चुनौती ही बना रहेगा.

पिथौरागढ़ जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश चंद्र सती ने जानकारी देते हुए बताया कि निदेशालय से आए आदेश के अनुसार, ऐसे सभी भवनों को चिह्नित किया जा रहा है, जो जर्जर हालत में हैं. ऐसे स्कूलों में छात्रों को नहीं बिठाया जाएगा.

पिथौरागढ़ के 33 विद्यालयों को तत्‍काल ध्‍वस्‍त करने की जरूरत 

दरअसल लंबे समय से रखरखाव न होने और बजट के अभाव में सरकारी स्कूलों के भवन खंडहर बनते जा रहे हैं. जिले में ऐसे सरकारी विद्यालयों की संख्या काफी ज्यादा है. अब ऐसे भवनों का आपदा एक्ट के तहत पुनर्निर्माण किया जाएगा. जिले के 33 ऐसे विद्यालय हैं, जिन्हें तत्काल ध्वस्त कर नया भवन बनाने की जरूरत है. जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण तक छात्रों के पठन-पाठन का कार्य किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर किए जाने का फैसला लिया गया है.

जिले के सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश कुमार ने सरकारी स्कूलों की बदहाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वह लंबे समय से अपने क्षेत्र में स्कूलों की बदहाली पर लगातार शिकायत करते आए हैं, लेकिन अब तक स्कूलों की कोई सुध नहीं ली गई. उन्होंने कहा कि चंपावत में भी अगर पहले ही स्कूल की हालत सुधार ली जाती, तो आज यह हादसा नहीं होता.

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