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Agency:News18 Uttarakhand

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Almora: कोर्स की किताबों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और मोटिवेशनल बुक्स तक, आपको इस दुकान में सब मिल जाएगा. सालों पुरानी ये शॉप किताबों का हब है जहां बुक्स की इतनी वैरायटी हैं कि यहां आकर आपको कहीं और…और पढ़ें

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अल्मोड़ा में स्थित अल्मोड़ा किताब घर.

अल्मोड़ा. आजकल के आधुनिक युग में हर कोई डिजिटल की ओर बढ़ रहा है जिस वजह से लोग किताबों में कम रुचि दिखा रहे हैं. पर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में एक ऐसा बुक स्टोर भी है जहां पर आपको किताबों का भंडार देखने को मिलेगा. अल्मोड़ा के वन विभाग कार्यालय के पास है अल्मोड़ा किताब घर. यहां पर आपको हर तरह की किताबें मिल जाएंगी. इस स्टोर में छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों के लिए भी किताबें उपलब्ध हैं.

सालों पुरानी है ये दुकान
इसके अलावा, यहां पर सभी कोर्सों से संबंधित किताबें और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चों के लिए भी किताबें उपलब्ध हैं. अल्मोड़ा किताब घर के मालिक जयमित्र बिष्ट ने बताया कि इस दुकान की स्थापना साल 1988 में हुई थी. उनके पिता, उत्तराखंड के वरिष्ठ आंदोलनकारी स्वर्गीय शमशेर सिंह बिष्ट ने इसे खोला था, जिसके बाद से वे लगातार इस बुक स्टोर को चला रहे हैं.

हर तरह की किताब मिलती है यहां
दुकान मालिक जयमित्र बिष्ट ने बताया कि अल्मोड़ा शुरुआत से ही शिक्षा का केंद्र रहा है. अल्मोड़ा का इतिहास काफी प्राचीन रहा है क्योंकि यहां से कई जानी-मानी हस्तियां निकली हैं. अल्मोड़ा में पहाड़ी आंचल और बाहर के बच्चे पढ़ने आते हैं. प्राइवेट और सरकारी स्कूलों की किताबें, यूनिवर्सिटी की किताबें और विभिन्न कोर्सों से संबंधित किताबें यहां पर मिल जाती हैं. इसके अलावा, प्रेरणादायक किताबें भी यहां उपलब्ध हैं, जैसे स्वामी विवेकानंद और अन्य महान व्यक्तित्वों से संबंधित किताबें. यहां पर पहाड़ी और विदेशी लेखकों की किताबें भी मिलती हैं.

कोरोना के बाद कम हुई बिक्री
जयमित्र बिष्ट ने यह भी बताया कि कोरोना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की बिक्री में थोड़ी गिरावट आई है क्योंकि ऑनलाइन शिक्षा के कारण बच्चे मोबाइल और लैपटॉप के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं. हालांकि, जब बच्चों को कुछ किताबों की जरूरत पड़ती है, तो वे उन्हें मंगवाते हैं और खरीदते हैं. इनकी डिमांड कम हुई है पर अभी भी मांग आती रहती है.

एक जगह मिल जाती हैं सारी किताबें
ग्राहक आशुतोष उप्रेती ने बताया कि वे करीब पांच साल से यहां आ रहे हैं. छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों के लिए यहां किताबें उपलब्ध रहती हैं. लगभग सभी किताबें यहां मिल जाती हैं. जब उन्हें कोई विशेष किताब पढ़नी होती है, तो वे जयमित्र बिष्ट से मांग करते हैं और फिर वे उन्हें उपलब्ध कराते हैं. आशुतोष ने बताया कि वे अब तक शैलेश मटियानी और मनोहर श्याम जोशी जैसे लेखकों की किताबें यहां से ले चुके हैं. अल्मोड़ा में यह एकमात्र स्टोर है, जहां विभिन्न तरह की किताबें मिलती हैं, और उन्हें बेहद खुशी है कि उनके जैसे पाठकों के लिए यह किताबों का खजाना है.

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इसे किताबों की दुकान नहीं कहिए बुक हब, सब मिलता है यहां, नोट कर लें पता

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