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Folk Music Program In Government Schools Of Uttarakhand : उत्तराखंड के 380 सरकारी स्कूलों में ‘लोकधुन’ कार्यक्रम शुरू होगा, जिसमें छात्रों को ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र सिखाए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य…और पढ़ें

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उत्तराखंड के स्कूलों के छात्र सीखेंगे ढोल दमाऊ की थाप

हाइलाइट्स

  • उत्तराखंड के 380 स्कूलों में लोकधुन कार्यक्रम शुरू होगा.
  • छात्रों को ढोल-दमाऊ जैसे वाद्य यंत्र सिखाए जाएंगे.
  • 12 जिलों में हाईटेक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाए जाएंगे.

देहरादून : अब उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेल-कूद और संस्कृति की भी गूंज सुनाई देगी. शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखते हुए राज्य सरकार ने एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है. समग्र शिक्षा योजना के तहत वर्ष 2025-26 में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में खेल और लोक संगीत को बढ़ावा देने के लिए फैसला लिया गया है. इस नई पहल से जहां छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश की जाएगी, वहीं राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को भी स्कूली स्तर से जीवित रखने की दिशा में प्रयास किया जाएगा.

इस योजना में 2 बड़े फोकस प्वाइंट हैं, खेलों को लेकर आधुनिक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स की स्थापना और लोकधुन कार्यक्रम के ज़रिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण. शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस योजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.

380 स्कूलों में शुरू होगा विशेष कार्यक्रम
राज्य के 380 सरकारी स्कूलों में ‘लोकधुन’ नाम से विशेष कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. इसके तहत मशकबीन, ढोल, दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. ख्याति प्राप्त लोक कलाकार और प्रशिक्षक बच्चों को इन वाद्य यंत्रों की बारीकियां सिखाएंगे. इसका उद्देश्य बच्चों में सांस्कृतिक समझ और गौरव को बढ़ाना है.

12 जिलों में बनेंगे हाईटेक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स
उत्तराखंड के 12 जिलों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाए जाएंगे. इनमें बॉक्सिंग, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस आदि खेलों के लिए आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध होंगे. इसका मकसद ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी खेलों में करियर का अवसर देना है.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर फोकस
स्कूलों में छात्रों की तर्कशक्ति को विकसित करने के लिए अभिरुचि परीक्षण कार्यक्रम भी चलाया जाएगा. हर महीने ओएमआर शीट आधारित टेस्ट होंगे, जिससे बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयारी मजबूत होगी. शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि सरकारी स्कूलों में नवाचार लाने के लिए यह योजना एक मील का पत्थर साबित होगी. इससे बच्चों में आत्मविश्वास, प्रतिभा और संस्कृति तीनों का संतुलित विकास होगा.

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