ग्रेजुएशन के 4 साल बाद भी डिग्री के लिए भटक रहे छात्र
कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी की लापरवाही के भंवर में हजारों विद्यार्थी ऐसे फंसे की उन्हें सब काम छोड़ तपती दोपहरी में चक्कर काटने को मजबूर हो गए। कभी कॉलेज तो कभी विश्वविद्यालय का रास्ता नाप रहे हैं। हालात यह हैं, ग्रेज्यूएशन व पोस्ट ग्रेज्यूएशन पूरी करने के 4 साल बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिली। अफसरों की लेटलतीफी का आलम यह है, आगामी 2 जुलाई को दीक्षांत समारोह है, लेकिन कॉलेजों को वर्ष 2019 की डिग्रियां बांटी जा रही हैं। जबकि, अभी तक संभाग के अधिकतर कॉलेजों में वर्ष 2020 की डिग्रियां तक नहीं पहुंची। जिसकी वजह से उनकी नौकरी व हायर एजुकेशन पर आंच आ गई। पिछले चार साल से विद्यार्थी डिग्री के लिए कभी कॉलेज तो कभी यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। हालांकि, डिग्री के एवज में उन्हें प्रोविजनल डिग्री दी जा रही है, जिसका भी शुल्क यूनिवर्सिटी वसूल रही है। लेकिन, प्रोविजनल डिग्री छह माह तक ही वैलिड होती है। ऐसे में छात्रों को फिर से डिग्री के लिए दौड़भाग करनी पड़ती है।
तनाव से गुजर रहे छात्र
कोटा विश्वविद्यालय के अफसरों की लेटलतिफी का दंश हजारों छात्र मानसिक तनाव झेलकर भुगत रहे हैं। पिछले चार साल में कई विद्यार्थी निजी सेक्टर में जॉब पर लगे हैं तो कोई आगे की पढ़ाई के लिए बाहर की यूनिविर्सिटीज में एडमिशन लिया लेकिन दोनों ही जगह आॅरिजनल डिग्री मांगी जा रही है। जब छात्र डिग्री लेने कॉलेज पहुंचते हैं तो उन्हें यूनिवर्सिटी से प्राप्त नहीं होने की बात कहीं जाती है। इसके बाद वे विश्वविद्यालय के चक्कर काटते हैं। जहां उनसे 100 रुपए शुल्क लेकर प्रोविजनल डिग्री दी जाती है। लेकिन, वह 6 माह तक ही वेलिड मानी जाती है।
कॉलेजों में नहीं पहुंची 2020 की मास्टर डिग्री
कोटा जिले के अधिकतर राजकीय महाविद्यालयों में वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री अब तक नहीं पहुंची है। हालांकि, कुछेक कॉलेजों में आई है लेकिन वह भी यूजी की। जबकि, पीजी और स्वयंपाठी विद्यार्थियों की तो पहुंची ही नहीं। दैनिक नवज्योति ने जिले के 10 राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों से बात की तो पता चला कि उनके कॉलेजों में वर्ष 2019 की मास्टर डिग्री आई है। लेकिन, 2020 की नहीं मिली। वहीं, जिन कॉलेजों में डिग्री आई हैं, वहां विद्यार्थियों को 8 दिन बाद ही मिल सकेगी। तब तक उन्हें इंतजार करना होगा।
इन कॉलेजों में यूजी की डिग्री आई, पीजी की नहीं
शहर के गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की प्राचार्य प्रेरणा सक्सेना ने बताया कि कुछ दिन पहले ही वर्ष 2020 में स्नातक करने वाले नियमित विद्यार्थियों की मास्टर डिग्री यूनिवर्सिटी से आई है। लेकिन, स्नातकोत्तर व यूजी-पीजी के स्वयंपाठी छात्रों की डिग्रियां नहीं आई। वहीं, राजकीय कन्या वाणिज्य महाविद्यालय की प्राचार्य वंदना आहूजा ने कहा, यूजी के रेगुलर छात्रों की ही डिग्री आई है लेकिन आॅनर्स संकाय व पीजी के नियमित-प्राइवेट छात्रों की डिग्री नहीं भेजी गई। जेडीबी साइंस की प्राचार्य सीमा चौहान के अनुसार, यूजी नियमित व गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य अरुण कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में स्नातक करने वाले नियमित छात्रों की ही डिग्री पहुंची है लेकिन पीजी के नियमित और स्वयंपाठी विद्यार्थियों की डिग्री अब तक नहीं आई है।
7 साल बाद कॉलेजों में पहुंची 2019 की डिग्री
कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा जिले के 7 महाविद्यालयों में वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री के बजाए वर्ष 2019 की डिग्री भेजी गई है। जिनमें जेडीबी आर्ट्स कॉलेज, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा सहित ग्रामीण जिले के चारों महाविद्यालय शामिल हैं। ऐसे में सत्र 2016-17 में एडमिशन लेकर 2019 में गे्रज्यूएशन करने वाले छात्रों को वर्ष 2024 में यानी साढ़े 7 साल बाद मास्टर डिग्री मिलेगी। वहीं, सत्र 2017-18 में एडमिशन लेने वाले छात्रों की यूजी वर्ष 2020 में पूरी हो गई लेकिन उन्हें अब तक मास्टर डिग्री नसीब नहीं हुई।
यहां नहीं आई वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री
कोटा व बारां जिले के एक दर्जन से अधिक कॉलेजों में वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री अब तक नहीं पहुंची है। कोटा यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही से विद्यार्थियों को अकेडमिक व रोजगार से संबंधित विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोटा के राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, राजकीय कला महाविद्यालय कोटा, कनवास, सांगोद, इटावा, रामगंजमंडी सहित गवर्नमेंट कॉलेजों में यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2020 की डिग्री नहीं भेजी गई।
विद्यार्थियों ने बयां की पीड़ा
पिछले चार सालों में नौकरी छूटी तो कहीं एडमिशन अटका, प्रोविजनल के नाम पर 100-100 रुपए वसूल विश्वविद्यालय काट रहा स्टूडेंट्स की जेब
मैंने वर्ष 2020 में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा से बीए किया था। वर्तमान में निजी कम्पनी में जॉब कर रहा हूं। जहां ग्रेज्युएशन की मास्टर डिग्री मांगी जा रही , जो अब तक मुझे कोटा यूनिवर्सिटी से नहीं मिली। हालांकि, 100 रुपए शुल्क लेकर प्रोविजनल डिग्री दी गई लेकिन वह 6 माह तक ही वैध मानी जाती है। इसके बाद फिर से कम्पनी ने डिग्री का तकाजा किया तो मुझे फिर से यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विवि प्रशासन की लेटलतीफी के कारण अनावश्यक तनाव झेल रहा हूं। जॉब ही खतरे में पड़ रही है।
– अमित कुमार, छात्र
मुझे दिल्ली से पीएचडी करनी है, जिसके लिए आॅरिजनल मास्टर डिग्री की जरूरत है। लेकिन, कोटा विवि द्वारा चार साल बाद भी डिग्री नहीं दी जा रही है। दिल्ली संस्थान द्वारा बार-बार आॅरिजनल डिग्री की मांग की जा रही है। पिछले चार साल में कई बार यूनिवर्सिटी के चक्कर काट चुके हैं। वहां से कोटा आने जाने में ही हजारों रुपए खर्च हो गए लेकिन डिग्री कब मिलेगी इसका जवाब नहीं मिल रहा।
– जीतेश मीणा, स्टूडेंट
कोटा यूनिवर्सिटी की लापरवाही का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। वर्ष 2022 में निजी कम्पनी में जॉब के लिए इंटरव्यू दिया था, जहां सलेक्ट होने के बाद मास्टर डिग्री मांगी गई, इस पर यूनिवर्सिटी गया तो वहां 100 लेकर प्रोविजनल डिग्री दे दी गई, जिसे कम्पनी ने स्वीकार नहीं किया। ऐसे में हाथ आई नौकरी छूट गई। मेरे जैसे कई छात्र हैं जो कोटा विवि प्रशासन की लेटलतिफी से तनाव झेल रहे हैं।
– देवकी नंदन, छात्र
एक तरफ कोटा यूनिवर्सिटी 2 जुलाई को 2021 का दीक्षांत समारोह मनाने जा रही है और दूसरी तरफ 2020 की डिग्री 2024 तक नहीं दे सकी तो 2021 की डिग्रियां विद्यार्थियों को कब मिलेगी। इसका अंदाजा स्वयं ही लगा सकते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन की लचरता से पिछले 4 साल में कई छात्र नौकरी गंवा चुके हैं तो कई विदेशी यूनिवर्सिटीज में एडमिशन नहीं ले पाए। क्योंकि, वहां प्रोविजनल डिग्री को वैलिड नहीं मानते। गलती अफसर कर रहे हैं और प्रोविजनल के नाम पर विद्यार्थियों से 100-100 रुपए लेकर लूटा जा रहा है। विवि प्रशासन प्राइवेट फर्म को काम देती है और उसने समय पर पूरा नहीं किया। इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा संबंधित फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आती है।
– रोहिताश मीणा, छात्रसंघ महासचिव, कोटा यूनिवर्सिटी
इनका कहना है
अधिकतर कॉलेजों में मास्टर डिग्रियां भेजी जा चुकी है। कुछ महाविद्यालय शेष हैं, जहां भेजी जा रही है। किसी भी विद्यार्थी को कोई परेशानी नहीं है, जो स्टूडेंट्स डिग्री के लिए यहां आ रहे उन्हें दी जा रही है।
– प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक, कोटा यूनिवर्सिटी