पहाड़ के युवाओं में घट रही बीएड की चाह! आधी से ज्यादा सीटें खाली, जानें क्यों


तनुज पाण्डे, नैनीताल –उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के युवाओं में कभी बीएड करने का जबरदस्त क्रेज था. एक-एक सीट के लिए दर्जनों छात्र आवेदन करते थे. दाखिला पाने के लिए हर छात्र को जद्दोजहद करनी पड़ती थी. आज हाल यह है कि कुमाऊं यूनिवर्सिटी को बीएड पाठ्यक्रम के लिए छात्र नहीं मिल रहे हैं. 3900 सीटों के लिए केवल 1691 अभ्यर्थी मिले हैं. बीएड में अब युवाओं की दिलचस्पी न होने का मुख्य कारण बीएड के बाद टीईटी की अनिवार्यता है और शिक्षक पदों पर रोजगार कम होना है. ऐसे में छात्र अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. ऐसे में बीएड पाठ्यक्रम में बेहद कम बच्चों का प्रवेश लेना चिंता का विषय भी बनता जा रहा है.

विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 3900 सीटों के लिए पहली काउंसलिंग केवल 25 अभ्यार्थियों ने करवाई थी. इसके बाद दूसरी काउंसिलिंग में 3900 सीटों के सापेक्ष विश्वविधालय को मात्र 1691 अभ्यार्थी मिल पाए. अब बीएड की तीसरी काउंसलिंग करवाने की तैयारी है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इस घटती संख्या के पीछे इंटीग्रेटेड बीएड का शुरू होना है. क्योंकि सरकार की तरफ से साफ तौर पर कह दिया गया है कि आने वाले समय में नौकरियों के लिए सिर्फ इंटीग्रेटेड बीएड ही मान्य होगा.

एग्जाम के बिना हुए दाखिले
कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर डी एस रावत ने बताया कि हल्द्वानी के आम्रपाली इंस्टीट्यूट ने बिना एग्जाम के बच्चों के दाखिले कर दिए थे. मामला विश्वविधालय के संज्ञान में आने पर उन सभी छात्रों के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई ताकि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न हो. उन्होंने बताया कि उक्त संस्थान के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए विश्वविद्यालय विचार कर रहा है.

कुलपति ने बताया की बच्चों का बीएड के प्रति रुझान कम होना चिंता का विषय है, उन्होंने बताया की एडमिशन के मानक को सुधारने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा जरूरी कदम उठाए जाएंगे, सभी चीजें पारदर्शिता के साथ होंगी, और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दास्त नहीं किया जाएगा.

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