बदहाल स्थिति में शिक्षा: पिथौरागढ़ में व्यवस्था संभालने वालों का टोटा, कैसे सुधरेंगे हालात?


रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है. जनपद की शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा लंबे समय से जिले में रिक्त पड़े पदों को देखकर लगाया जा सकता है. गौरतलब है कि सरकार जिले में खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को नहीं भर पाई है. जिले में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित तमाम अधिकारियों का टोटा है. इसके बावजूद भी इन पदों को भरने के लिए लंबे समय से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं. जिसका सीधा असर कहीं न कहीं पिथौरागढ़ के सरकारी स्कूलों से विद्या प्राप्त करने वाले छात्रों पर पड़ रहा है.

जनपद पिथौरागढ़ में पिछले कई वर्षों से शिक्षा विभाग में तमाम पद खाली पड़े हुए हैं, जिन्हें भरने में सरकार गंभीर नहीं दिखाई देती है. दरअसल सीमांत जिले में प्रधानाचार्य के 128 पदों में से 105 पद खाली हैं. प्रधानाध्यापक के 87 पदों में से 77 रिक्त हैं. जिले में 8 विकासखंड में सिर्फ एक खण्ड शिक्षा अधिकारी और उप-शिक्षा अधिकारी तैनात हैं. बात अगर प्रवक्ता पद की करें तो 1069 में से 570 खाली हैं. यही हाल सहायक अध्यापक के पदों की संख्या का है, जहां 1493 पदों के सापेक्ष 437 पद खाली पड़े हैं. इतनी भारी संख्या में शिक्षकों और अधिकारियों का टोटा जनपद पिथौरागढ़ में है.

जिले में गेस्ट टीचर की मदद से विद्यालयों में पढ़ाई सुचारू हो रही है. जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी जेएस जुकरिया ने समय-समय पर शासन को इस समस्या से अवगत कराने की बात कही है. शिक्षकों की भारी कमी के चलते जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं, जिसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है.

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