यहां पेड़-पौधे और सब्जियों से तैयार होता है खास कलर, सेहत को नहीं करता नुकसान, होली पर होती है भारी डिमांड


रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा: रंगों का त्योहार होली (Holi 2024) इस साल 25 मार्च को है. लेकिन, बाजारों में रौनक अभी से होने लगी है. ऐसे में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के दिव्यांग बच्चों द्वारा होली के लिए हर्बल कलर बनाए जा रहे हैं. खत्याड़ी में स्थित मंगलदीप विद्या मंदिर में पढ़ने वाले बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ उन्हें आजीविका से भी जोड़ने का काम किया जाता है. बच्चों द्वारा अलग-अलग त्योहारों पर संबंधित चीजें तैयार करते हैं. अब इस समय होली के लिए बच्चे हर्बल कलर बना रहे हैं, जो फूल, पत्तों और चुकंदर से तैयार होते हैं. इन्हें पहले सुखाने के लिए रखा जा रहा है. इसके बाद उन्हें पीसकर तैयार किया जाता है.

मंगलदीप विद्या मंदिर स्कूल की प्रधानाचार्य भारती पांडे ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए यह स्कूल पिछले कई साल से काम कर रहा है. बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उन्हें कौशल विकास से भी जोड़ा जाता है. अब होली के लिए बच्चों द्वारा हर्बल कलर तैयार किए जा रहे हैं. इन रंगों को बनाने के लिए गेंदे का फूल, पत्ते और चुकंदर का इस्तेमाल किया जा रहा है. 20 ग्राम हर्बल कलर के पैकेट की कीमत 10 रुपये है. अगर कोई भी इन रंगों को खरीदना चाहता है, तो वह स्कूल से संपर्क कर सकता है या फिर इस मोबाइल नंबर 9719258978 पर भी कॉल कर सकता है.

9 साल से हर्बल रंग बनाने का काम
छात्र सचिन जोशी ने कहा कि वह स्कूल में पढ़ाई करने के साथ-साथ त्योहारों के लिए अलग-अलग चीज भी बनाते हैं. इस बार होली के लिए वे लोग हर्बल कलर तैयार कर रहे हैं. इसके लिए वे फूल और पत्तों को पहले सुखाते हैं, जिसके बाद इन्हें पीसा जाता है.  फिर इन्हें पैक भी उनके ही द्वारा किया जाता है. छात्र रोहित कनवाल ने कहा कि वह करीब 9 साल से होली के लिए हर्बल कलर तैयार कर रहे हैं. इसे तैयार करने में उन्हें काफी अच्छा लगता है. क्योंकि, फूल और पत्तों से इस कलर को तैयार किया जाता है. स्थानीय लोग और शारदा स्कूल के बच्चे और टीचर इन कलर को खरीदते हैं. ये रंग स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

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