रिपोर्ट- तनुज पाण्डे/ नैनीताल. उत्तराखंड की लोककला ऐपण अब खास मौकों पर घर के आंगन, देहली, मंदिर व दीवारों तक ही सीमित नहीं रह गई है. यह कला अब घर की दहलीज़ों से बाहर निकलकर रक्षाबंधन की राखी से लेकर तमाम अवसरों पर विदेशों तक अपनी पहचान बनाने लगी है. इसी रूप में ऐपण कला का शानदार नमूना भीमताल की बेटी पूजा पडियार ने पेश किया है. प्रदेश के साथ ही देश और विदेश में अपनी कला का लोहा मनवा रहीं पूजा मूल रूप से ओखलकांडा ब्लॉक के भीड़ापानी की रहने वाली हैं और वर्तमान में भीमताल में रह रही हैं. वह डीएसबी कॉलेज में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट की छात्रा हैं. पूजा ने बताया कि उत्तराखंड में विलुप्त होती उत्तराखंड की फोल्क आर्ट ऐपण के जरिए लोक कलाओं को सहेजने, लोक कलाओं को जीवंत रखने की दिशा में कार्य कर रही हैं. कला को सहेजने, आगे बढ़ाने के साथ ही उसे नए रूप में दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश है.
पूजा ने अपनी कला को अपने स्वरोजगार का जरिया भी बनाया है. उन्होंने बताया कि उनके साथ क्षेत्र में आसपास की महिलाएं भी काम कर रही हैं, जो स्टिचिंग, दीये को रंगने का काम करती हैं. उनकी बनाई पेंटिंग्स और ऐपणों की डिमांड देश में ही नहीं विदेशों तक रहती है. पूजा सोशल मीडिया के जरिए अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाती हैं. इंस्टाग्राम में उनका ऐपण क्रिएशन नाम से अकाउंट है, जिसमें उनके साथ हजारों की संख्या में दुनिया के कोने कोने से लोग जुड़े हुए हैं. इसके अलावा पूजा स्कूलों में जाकर छात्रों को भी कुमाऊंनी संस्कृति और ऐपण से जुड़ी शिक्षा दे रही हैं. पूजा ने बीते दिनों ऋषिकेश में आयोजित जी-20 सम्मेलन के लिए भी कई जगह दीवारों पर ऐपण की प्रस्तुति दी थी, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही.
लोककला से कई उत्पादों का कर रही हैं निर्माण
पूजा ऐपण से नेम प्लेट, कुमाऊंनी टोपी, शादी विवाह की चौकी, फोटो फ्रेम और लकड़ी के उत्पादों पर भी ऐपण के खूबसूरत आकृतियां बनाती हैं. ऐपण द्वारा बनाए गए उत्पादों की कीमत 100 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक हैं. पूजा ने बताया कि विभिन्न विभागों के सहयोग से अलग अलग स्थानों में स्टाॅल लगाकर लोक कला को समेटे उनके द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन किया जाता है और उत्पादों को बेचा जाता है.
नीम करौली बाबा की पेंटिंग से की थी शुरुआत
पूजा पडियार की बनाई नीम करौली बाबा और कैंची धाम की पेंटिंग सोशल मीडिया में काफी वायरल हुई थी, जिसे लाखों की संख्या में लोगों ने देखा था. पूजा ने बताया कि उन्होंने बाबा की पेंटिंग से ही उत्तराखंड के कल्चर को दिखाने की शुरूआत की थी. नीम करौली बाबा की पेंटिंग के बाद उनके पास विदेशों से भी उस कई तरह की पेंटिंग की डिमांड आईं. पूजा बताती हैं कि उनका सपना उत्तराखंड की फोल्क आर्ट को देश से दुनिया तक प्रसिद्ध करना है.
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कई हस्तियां पूजा के हुनर की कायल
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी पूजा को उनके बनाए ऐपणों के लिए सम्मानित किया था. इसके अलावा अभिनेता रोनित रॉय समेत तमाम हस्तियों ने भी उनके हुनर को सराहा है. पूजा को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.
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FIRST PUBLISHED : October 6, 2023, 16:51 IST
