म्हारी छोरियां छोरो से कम है के... देव भूमि की बेटियां कराटे के फाइटिंग रिंग..


हिना आज़मी/ देहरादून: वंदना कटारिया से लेकर मानसी नेगी तक देवभूमि उत्तराखंड में बेटियों ने स्पोर्ट्स में भी अपनी धाक जमाई है. पहाड़ और जंगलों में संघर्ष करने वाली इन बेटियों ने कड़ी मेहनत और लगन से कराटे का प्रशिक्षण लिया और जापान के इस खेल में शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली कराटे चैंपियनशिप में अपना दमखम दिखाती नजर आ रही है. कोई सुदूर पहाड़ से 50 किमी दूर प्रशिक्षण लेने आती, तो कोई आर्थिक हालातों से लड़कर पहुंचती, तो किसी को समाज से लड़ना पड़ा लेकिन छोटी उम्र में ही हर संघर्ष से लड़ती हुई ये खिलाड़ी लड़कियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं.

लोकल 18 से बातचीत में कनिका जोशी ने बताया कि वह नैनीताल की रहने वाली है. उन्हें बचपन से ही कराटे करना पसंद था,  लेकिन परिवार की अच्छी आर्थिक स्थिति नहीं थी कि वह ट्रेनिंग लें सके. वह स्कूल के कंपटीशन में प्रतिभा करती थी और अच्छा परफॉर्म करती थी. उन्होंने बताया कि वे 3 भाई बहन है और उनके पिता 70 साल की सर्विस देने के बाद रिटायर हो गए हैं.  जिसके बाद घर का खर्च और फिर उनके लिए स्पोर्ट्स में आना और इक्विपमेंट्स लेना बहुत मुश्किल था.  लेकिन उनके पिता ने बेटी के हौसले को देख उसे आगे बढ़ने दिया. कनिका ने स्टेट लेवल में गोल्ड मेडल जीता है.उन्होंने बॉक्सिंग की स्टेट और नेशनल प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और अच्छा परफॉर्म किया.

वहीं पायल मेहता ने बताया कि वह हल्द्वानी के चोरगलिया में रहती हैं. जहां स्पोर्ट्स की इतनी फैसिलिटी नहीं है.  उन्हें वहां से 50 किलोमीटर दूर हल्द्वानी में प्रशिक्षण लेने के लिए आना पड़ता है. उन्होंने बताया कि उनके पिता प्राइवेट जॉब करते हैं. फिर भी उन्हें गेम्स के लिए सपोर्ट कर रहे हैं. इसलिए वह चाहती है कि आने वाले वक्त में वह नेशनल से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलें और अपने माता-पिता का नाम रोशन करे. सिर्फ आठ महीनों में ही पायल ने ओपन नेशनल कॉम्पटीशन में स्टेट और डिस्ट्रिक्ट में गोल्ड मेडल जीता था.

मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली फरहीन सैफी बताती है कि वह हल्द्वानी की रहने वाली है और 12वीं कक्षा में पढ़ रहीं हैं. उनका कहना है कि रिश्तेदार और जानकारों ने उन्हें बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन वह नहीं रुकी. 6 साल की उम्र से कराटे करने वाली फरहीन की मां ने ही उन्हें कराटा सीखने के लिए प्रेरित किया. फरहीन मानती है आज के जैसे समाज में सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे और मार्शल आर्ट आना बेहद जरूरी है. अगर कोई लड़की कहीं फंस जाती है, तो वह आराम से उस स्थिती से मुकाबला करते हुए निकल पाए. फरहीन दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही है.  वह भी एशियन गेम्स जैसे बड़े खेल आयोजनों का हिस्सा बनना चाहती हैं.

विश्व पटल पर कराटे में आगे बढ़ता भारत
कराटे इंडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत शर्मा ने जानकारी दी कि उत्तराखंड में दूसरी बार कराटे चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है. केंद्र सरकार खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही है.  जिसके परिणामस्वरुप देश को अच्छे खिलाड़ी मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि एशियन गेम्स के अंदर और वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के युवा मेडल जीते. उन्होंने बताया कि भारत साउथ एशिया के अंदर नम्बर 1 और पूरे एशिया में 7-8 की रैंकिंग में पहुंच गए हैं.

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