Almora News : बाल वाटिका के अंदर है ज्ञान का खजाना, छोटे-छोटे बच्चे खेल-खेल में अर्जित कर रहे ज्ञान

बच्चों की शिक्षा की नींव बचपन से रखी जाती है क्योंकि बच्चे बड़े होकर अपने आने वाले भविष्य को तैयार करते हैं. इसी को देखते हुए बच्चों को कैसे खेल खेल में पढ़ाया जाए इसके लिए बैकलेस एजुकेशन शुरू की गई है. अल्मोड़ा के सरस्वती शिशु मंदिर जीवन धाम में बच्चों को कैसे पढ़ाया जा रहा है . हम आपको इस खबर में बताते हैं.

इस क्लास का दरवाजा खोलते ही आपको यहां पर कितने डिग्री में दरवाजा खुल रहा है यह सबसे ये देखने को मिलता है. इस बाल वाटिका के अंदर आपको विभिन्न तरीके के पाठ्यक्रम एक ही जगह पर देखने को मिलता है जिसमें भाषा प्रयोगशाला, वस्तु संग्रहालय, विज्ञान प्रयोगशाला, रंगमंच कार्यशाला, कला कार्यशाला आदि देखने को मिलते हैं. यहां बच्चे खेल खेल में काफी कुछ सीख रहे हैं. प्ले ग्रुप के बच्चों को काफी कुछ नया सिखाया जा रहा है. इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक बताते हैं कि वह पहले दिन तो बच्चों को रोते हुए छोड़ कर गए और अगले दिन से बच्चे खुशी-खुशी स्कूल आना शुरू कर देते हैं.

खेल-खेल में दिया जा रहा अनुभव आधारित ज्ञान
स्कूल की प्रधानाचार्य पूनम जोशी ने बताया स्कूल में जो बाल वाटिका की शुरुआत पिछले साल से शुरू हुई थी. इस बाल वाटिका के शिक्षकों की  ट्रेनिंग गुजरात में हुई थी. नई शिक्षा नीति के तहत एनईपी में कैसे बच्चों को बैगलेस एजुकेशन दी जाए इसके लिए काम किया जा रहा है. इसी को देखते हुए प्ले ग्रुप में पढ़ने वाले बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जा रहा है. इस कक्षा में बच्चे अनुभव आधारित और क्रिया आधारित की पढ़ाई कर रहे हैं और बच्चे यहां पर काफी अच्छा अनुभव करते हैं. छोटे-छोटे बच्चे खेल-खेल में काफी कुछ नया यहां पर को सीख रहे हैं.

बच्चों को मिलता है पढ़ाई में आनंद
स्कूल की टीचर लता पाठक ने बताया प्लेग्रुप यानी कि अरुण की कक्षा में करीब 20 बच्चे पढ़ रहे हैं. जो बच्चे किताबों से सीखते हैं यहां के बच्चे खेल-खेल में उन्हें सीख रहे हैं. बच्चों में काफी रूचि देखने को मिल रही है और छोटे-छोटे बच्चे काफी बेहतर कर रहे हैं.अभिभावक लीला ने बताया कि उनकी यहां बच्ची पड़ती है. उनकी बेटी घर में बुझी-बुझी रहती थी पर स्कूल में आने के बाद वह हो खुल चुकी है और काफी कुछ नया उसने स्कूल में आकर सीखा है.

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