Haldwani: देश की पहली रामायण वाटिका में देख सकेंगे संजीवनी समेत 149 दुर्लभ वनस्पतियां


रिपोर्ट: पवन सिंह कुंवर

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में देश की पहली रामायण वाटिका बनाए जाने का दावा किया गया है. यह वाटिका देखने में जितनी सुंदर है, उतनी ही इस वाटिका में महत्वपूर्ण जानकारियां भी लोगों को मिल रही हैं. यह वाटिका पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. रामायण में भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा के दौरान वह जिन-जिन स्थलों और जंगलों से होकर गुजरे थे, वहां मिलने वाली वनस्पतियों का जिक्र रामायण में किया गया है. उन्हीं वनस्पतियों को हल्द्वानी स्थित वन अनुसंधान केंद्र में संरक्षित किया गया है, ताकि लोगों को इस बारे में जानकारी मिल सके.

रामायण वाटिका में वाल्मीकि रामायण में वर्णित संजीवनी बूटी से लेकर श्रीलंका के राष्ट्रीय वृक्ष नागकेसर सहित 149 वनस्पतियों को संरक्षित किया गया है. साथ ही वाल्मीकि रचित रामायण के अरण्य कांड में श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास का विवरण भी है. वन अनुसंधान केंद्र की इस रामायण वाटिका में कालखंड की वनस्पतियों के साथ ही रामायण की भी विस्तृत जानकारी मिलेगी. इसके लिए पूरी वाटिका में बोर्ड लगाए हैं, जिनमें तस्वीरों के साथ वनस्पतियों और श्रीराम की यात्रा का जिक्र भी किया गया है. किस वन में श्रीराम किस समय रहे और कौन सी वनस्पतियां उस वन में पाई जाती थीं, इन सभी बातों को यहां बताया गया है.

149 वनस्पतियां यहां हैं संरक्षित

वन अनुसंधान केंद्र के क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि यहां रामायण वाटिका में चित्रकूट की कंटकारी, असन, श्योनक, ब्राह्मी, दंडकारण्य की अर्जुन, टीक, पाडल, गौब, बाकली, पंचवटी की सेमल, सफेद तिल, तुलसी, किष्किंधा की चंदन रक्त, चंदन ढाक, नक्तमलका, मंदारा, मालती, मल्लिका, कमल, अशोक वाटिका की नागकेसर, चंपा, सप्तर्णी, कोविदारा, द्रोणागिरी की संजीवनी, विश्ल्यकरणी, संधानी, सुवर्णकर्णी, रुद्रवंती और जीवंती समेत अन्य कई प्रकार की वनस्पतियों को मिलाकर कुल 149 वनस्पतियों को संरक्षित किया गया है.

सरकारी स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त प्रवेश

मदन सिंह ने बताया कि आप भी इस वाटिका के दर्शन करने यहां आ सकते हैं. सरकारी विद्यालय के बच्चों के लिए यहां पर कोई भी शुल्क नहीं रखा गया है. वहीं, प्राइवेट स्कूल के बच्चों के लिए जो 10 साल से छोटे बच्चे हैं, उनका 10 रुपये का टिकट और जो 10 साल से बड़े हैं उनके लिए 25 रुपये का टिकट रखा गया है. साथ ही, आम जनमानस भी इस वाटिका के दर्शन करने आ सकते हैं. उनके लिए भी दस रुपये और 25 रुपये का टिकट रखा गया है.

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