Nainital News: नैनीताल की वो पहाड़ी जो रूस के अल्मा हिल्स से खाती है मेल, जानिए इसकी कहानी


रिपोर्ट: सीमा नाथ

नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड का खूबसूरत शहर नैनीताल चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यह अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और ठंडी आबोहवा की वजह से लोगों को बेहद पसंद आता है. यहां आकर स्वर्ग जैसा अहसास होता है. इस शहर का अपना एक अलग ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है. ब्रिटिश हुक्मरानों ने इस शहर को आरामगाह के रूप में बसाया था. इसके लिए उन्होंने सुख सुविधाओं भरे कई संसाधन भी जोड़े और इसी तरह धीरे धीरे समय के साथ साथ इस शहर के विकास में कई अध्याय जुड़ते चले गए. जिसमें शहर के ऐतिहासिक भवन भी शामिल हैं, जो बेहद खास है. लेकिन इन सब के साथ यहां एक ऐसी पहाड़ी मौजूद है, जिससे दर्द के साथ ही अतीत के सुनहरे पन्ने भी जुड़े हुए है. इस पहाड़ी का नाम है अल्मा, जो अपने अंदर कई दर्द समेटे हुए है.

दरअसल, नैनीताल में मौजूद ये पहाड़ी रूस में स्थित अल्मा पहाड़ी से हूबहू मेल खाती है, जिस वजह से अंग्रेजों ने इसका नाम भी अल्मा रख दिया था, जो आज भी इसी नाम से जाना जाती है.

रूस की पहाड़ी पर पड़ा नाम

नैनीताल के जानकार रमेश चंद्रा बताते है कि फ्रांस और इंग्लैंड के बीच हुए युद्ध में विजय होने के बाद जब इंग्लैंड की सेना नैनीताल पहुंची और उन्होंने देखा की नैनीताल में मौजूद यह पहाड़ी ठीक उसी पहाड़ी से मेल खाती है, जो उन्होंने रूस में देखी थी. जिसपर उन्होंने इसके समान रूप को देखते हुए इसे अल्मा नाम दिया, जो आज भी अल्मा के नाम से ही जानी जाती है. इसके बाद उनके द्वारा यहां अल्मा लॉज और अल्मा कॉटेज समेत कई निर्माण कार्य कर इस क्षेत्र का विकास किया गया.

1880 में क्षेत्र हो गया था तबाह

उन्होंने बताया कि अल्मा की यह पहाड़ी करीब 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसकी सुंदरता अपने आप में बेहद खास है. यहां से पूरे नैनीताल के दर्शन होते हैं, तो वहीं पहाड़ी के पीछे की ओर हिमालय के दर्शन होते है. अंग्रेजों ने 1860 के बाद इस पहाड़ी का विकास शुरू किया था, जिसमें कई तरह के भवनों व स्कूल के साथ ही इस क्षेत्र में ब्रिटिश अधिकारियों के रहने के लिए कोठियों का भी निर्माण किया गया. लेकिन 1880 में इस क्षेत्र में हुए भूस्खलन के बाद ये क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो गया.

राजभवन करना पड़ा था शिफ्ट

जिसके बाद इस पहाड़ी की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां निर्माण कार्य और विकास कार्य रोक दिए गए. इसके साथ ही अंग्रेजों द्वारा इस पहाड़ी में मौजूद राजभवन को भी अल्मा क्षेत्र से शिफ्ट कर अयारपाटा क्षेत्र में बनाया गया. इस तरह शहर की इस पहाड़ी का अंग्रेजों द्वारा नामकरण करने के साथ ही विकास किया गया.

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