रिपोर्ट- हिमांशु जोशी
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आज भी कई ग्रामीण इलाकों में सड़क नहीं पहुंच पाई है और जहां सड़क पहुंच गई है. उन इलाकों में बरसात के बाद सड़क की हालत खस्ता हो चुकी है, जिसका खामियाजा यहां रह रहे ग्रामीण उठा रहे हैं. हालात यह हैं कि सड़क मार्ग बंद होने से मरीजों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाया जाता है. जबकि इमरजेंसी में तत्काल इलाज न मिल पाने के कारण यह कई बार जानलेवा भी साबित हुआ है. बरसात के बाद बंद पड़े ग्रामीण मार्ग न खुलने से बच्चों को स्कूल जाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
धारचूला के खुमती गांव के ग्रामीण मरीजों को पीठ पर लादकर अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हैं. यहां नदी पर पुल न होने से लोग कंधे पर अपने बच्चों को नदी पार करा रहे हैं. खुमती के ग्राम प्रधान गोपाल सिंह ने बताया कि वह कई बार प्रशासन से व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे यहां रह रही करीब 1200 की आबादी प्रभावित हो रही है. उन्होंने प्रशासन से नदी-नालों पर वैकल्पिक पुल और खराब पड़े रास्तों को सही करने की मांग की है.
मूनाकोट ब्लॉक के कांटेबोरा गांव को जोड़ने वाली सड़क पर भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने से यहां मार्ग बंद रहा, जिससे यहां के मरीजों को भी लोग डोली के सहारे अस्पताल ले गए. फिलहाल यहां रास्ता तो खुल गया है, लेकिन बार-बार भूस्खलन की घटना से सड़क के आसपास रह रहे घरों के लिए खतरा पैदा हो गया है.
यहां के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क कटिंग के बाद पहाड़ी पर कई जगह दरारें आ गई हैं, जिससे हर साल यहां भूस्खलन हो रहा है. वहीं, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान को इन समस्याओं से अवगत कराने के बाद उन्होंने ग्रामीण इलाकों को रोड कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही है.
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FIRST PUBLISHED : September 30, 2022, 16:30 IST
