धाद संस्था का विशेष अभियान, स्कूलों में बनाएंगे 'बाल वाटिका'


देहरादून. पर्यावरण बचाने से लेकर उत्तराखंड के पहाड़ की संस्कृति की धरोहर बना लोकपर्व हरेला मंगलवार को राज्यभर में मनाया गया. वहीं देहरादून की धाद संस्था पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महीने तक विशेष अभियान चला रही है, जिसके तहत स्कूल और कॉलेज के बच्चों में पर्यावरण प्रेम जगाने के लिए ‘बाल वन’ अथवा ‘बाल वाटिका’ बनाई जाएंगी. राज्य के करीब 700 स्कूलों में इस अभियान को चलाया जाएगा.

धाद संस्था के सचिव तन्मय ममगई ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 14 वर्षों से हर साल धाद संस्था महीने भर के लिए किसी न किसी थीम पर हरेला पर्व मनाती है. ऑस्ट्रेलिया तक के लोग इस अभियान से जुड़े थे. इस साल हरेला पर धाद संस्था पर्यावरण को उत्तराखंड के निवासियों से जोड़ने पर काम कर रही है ताकि हर कोई इन पेड़-पौधों को भी अपने समाज का हिस्सा मान ले. उन्होंने कहा कि धाद संस्था हरेला उत्सव के तहत दो कार्यक्रमों को चला रही है. इसके अंतर्गत गांव में ‘हरेला गांव’ और शहरों में ‘हरेला वन’ चलाया जा रहा है. पहाड़ के गांव में खेती सिमटती जा रही है, जमीन बंजर हो रही है और गांव चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. वहां पेड़-पौधों को लगाया जाएगा. वहीं देहरादून जैसे शहर जो कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके हैं, के लिए हरेला वन कार्यक्रम है. उत्तराखंड के लोग जो बाहर रहते हैं, वे भी पेड़-पौधे से मानव के घनिष्ठ रिश्ता बना रहे हैं. हमारा यही नारा है कि ‘वृक्ष लगाएं, वृक्ष बचें, उपज हिमालय की अपनाएं.’

स्कूलों में बनाएंगे बाल वाटिका

हरेला वन के सचिव सुशील पुरोहित ने लोकल 18 को बताया कि धाद संस्था का संकल्प है कि पेड़ों के संरक्षण के साथ-साथ हमारे पहाड़ की उपज को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करें. यह पूरा महीना अन्न-धन का प्रतीक होता है. हम इस बार 500 पेड़ों के साथ जनसहभागिता के साथ वृक्षारोपण करने जा रहे हैं. हम हरेला वन, बाल वन और स्मृति वन जैसे कई कार्यक्रम चल रहे हैं. धाद संस्था के ‘एक कक्षा कोना का’ की सचिव आशा डोभाल ने लोकल 18 से कहा कि संस्था इस कार्यक्रम के साथ स्कूली बच्चों को जोड़ रही है ताकि उनमें पर्यावरण और वृक्ष के प्रति प्रेम भावना जागृत हो. रुद्रपुर के जूनियर हाईस्कूल में हमने बाल वाटिका भी बनाई है. इसमें 25 पौधे लगाए गए, जिनकी देखभाल उसी स्कूल के बच्चे कर रहे हैं. प्रकृति के प्रति बच्चों में प्रेम जगाने और उनके अंदर जागरूकता लाने के लिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं. 16 जुलाई से हरेला पर्व शुरू हो गया है और धाद संस्था 17 अगस्त तक महीने भर के लिए यह उत्सव मनाएगी.

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