कहीं धर्मशाला तो कहीं स्कूलों में चल रहे सरकारी कॉलेज
कोटा। हाड़ौती के सरकारी महाविद्यालय धर्मशाला व स्कूलों में चल रहे हैं, जहां सुविधाएं तो न के बराबर हैं लेकिन हादसों का खतरा भरपूर है। इन कॉलेजों को आज तक खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। कस्बों के सरकारी स्कूलों में उधार के कमरों में यह कॉलेज चल रहे हैं। हालात यह हैं, कहीं 2 तो कहीं 4 कमरों में कॉलेज संचालित करना पड़ रहा है। जबकि, अधिकतर महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 600 से ज्यादा है। वहीं, नए खुले कॉलेजों में भी 180 विद्यार्थियों का नामांकन है। ऐसे में विद्यार्थियों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती। हाल ही में हुए मिड टर्म परीक्षाओं में विद्यार्थी पहुंचे तो कॉलेज प्रशासन के लिए उन्हें बिठाना ही चुनौति बन गया। ऐसे में साधन संसाधनों के अभाव में उच्च शिक्षा के हीरे कैसे चमक पाएंगे।
जर्जर धर्मशाला में चल रहा इटावा कॉलेज
राजकीय इटावा महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, तब से यह करीब 51 साल पुरानी त्यागी धर्मशाला में चल रहा है। भवन जितना पुराना है, उतना ही जर्जर अवस्था में है। बरसात में कक्षा-कक्षों में पानी टपकता है। छतों का पलास्टर जगह-जगह उखड़ा है। हालांकि, 6 करोड़ की लागत से महाविद्यालय के नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके अलगे सेशन तक पूरा होने की संभावना है।
टीनशेड व पेड़ के नीचे लगती क्लासें
प्राचार्य रामदेव मीणा ने बताया कि इटावा कॉलेज में वर्तमान में 700 विद्यार्थी अध्यनरत हैं, जबकि, धर्मशाला में 5 कमरे मिले हैं, जिनमें से एक प्राचार्य आॅफिस है। ऐसे में 4 कमरों में ही कॉलेज चलाना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को बिठाने की जगह नहीं होने से बीए की दो कक्षाएं टीन शेड व पेड़ के नीचे लगानी पड़ती है। वहीं, कॉलेज में 7 विषय स्वीकृत हैं, जिसमें से 6 विषयों के शिक्षक ही नहीं है। परेशानियां तो बहुत है लेकिन नए कॉलेज भवन का निर्माण 75 प्रतिशत पूरा हो गया है।
कनवास: एक ही भवन में स्कूल और कॉलेज
कनवास के राजकीय आर्ट्स महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। तब से यह कॉलेज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। मजेदार बात यह है, स्कूल और कॉलेज एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। इस भवन में तीन दर्जन से अधिक कमरे हैं, जबकि कॉलेज के लिए 6 ही कमरे दिए हुए हैं। जिसमें एक कक्ष प्राचार्य आॅफिस है और 1 कक्ष स्टोर व ड्रॉइंग रूम बना रखा है। ऐसे में 4 कमरों में ही कॉलेज चल रहा है। जबकि, महाविद्यालय में 600 विद्यार्थियों का नामांकन है।
कहीं 2 तो कहीं 4 कक्षों में चल रहा कॉलेज
संभाग के एक दर्जन राजकीय महाविद्यालय ऐसे हैं जो कई सालों से अस्थाई स्कूल भवनों में चल रहे हैं। जहां जगह की तंगी होने से विद्यार्थियों को ठीक से बिठाना ही कॉलेज प्रशासन के लिए चुनौति रहती है। इनमें कोटा के इटावा, कनवास, बूंदी का तालेड़ा, झालावाड़ के असनावर, बारां के अटरू, सीसवाली, शाहबाद ब्यॉज व गर्ल्स, नाहरगढ़, छबड़ा गर्ल्स व राजकीय केलवाड़ा गर्ल्स महाविद्यालय शामिल है। इनमें कोई 2 तो कोई 4 कमरों में ही कॉलेज चल रहा है।
एक प्रिंसिपल चला रहे दो कॉलेज
बारां जिले का अटरू राजकीय महाविद्यालय 50 साल पुराना स्कूल भवन में संचालित हो रहा है। प्राचार्य बुद्धिप्रकाश का कहना है, कॉलेज में बीए तक 600 विद्यार्थियों का नामांकन है। जबकि, कक्षाएं 3 कक्षों में ही लग पाती है। कमरे छोटे होने से विद्यार्थियों को बिठाना तो दूर टेबल कुर्सियां तक नहीं लग पाती। जब पूरे विद्यार्थी कॉलेज आ जाए तो उन्हें बिठाने तक की जगह नहीं है। वर्तमान में उनके अलावा कोई और शिक्षक नहीं है। वे ही एकमात्र शिक्षक हैं, जो प्राचार्य की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा राजकीय गर्ल्स अटरू महाविद्यालय का संचालन भी नोडल आॅफिसर होने के नाते उन्हें ही करना पड़ता है।
कॉलेज चलाने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार
बूंदी जिले का तालेड़ा राजकीय महाविद्यालय राजकीय महात्मा गांधी सी.सै. स्कूल में संचालित हो रहा है। कॉलेज संचालित करने से पहले शिक्षकों व प्रचार्य को स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि, कॉलेज में कक्षा कक्ष की कमी है। ऐसे में कॉलेज को दोपहर की पारी में चलाना पड़ता है। पहली पारी में स्कूल सुबह 7.30 से 12.30 बजे तक चलता है। विद्यालय में कॉलेज को मात्र 3 कमरे ही मिले हैं। जिसमें एक प्राचार्य कक्ष है। ऐसे में 2 कमरों में ही महाविद्यालय चल रहा है। जबकि, 180 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में दो सेशन के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर पढ़ाना पड़ता है।
क्या कहते हैं विद्यार्थी
कॉलेज में न तो पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं और न ही बैठने के लिए जगह। कॉलेज जाने में समय की बर्बादी होती है। ऐसे में घर पर ही सेल्फ स्टडीज करनी पड़ती है। मिड टर्म के दौरान काफी परेशानियोें का सामना करना पड़ा।
– यश मेहता, छात्र प्रथम वर्ष, राजकीय इटावा महाविद्यालय
पढ़ने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। संभाग का यह एकमात्र कॉलेज है जो दोपहर को संचालित होता है। यहां दो ही कमरें हैं। बैठने के लिए जगह तक नहीं है। ऐसे में क्या पढ़े और क्या सीखे।इसका अंदाजा स्वयं लगा सकते हैं।
– तेजराज कुमार, छात्र, प्रथम वर्ष, राज. महा. तालेड़ा
क्या कहते प्राचार्य
सूखनी नदी स्थित नयागांव के पास कॉलेज के नए भवन का लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 6 करोड़ से दो मंजिला भवन तैयार हो रहा है। अगले सेशन में विद्यार्थी नए कॉलेज भवन में शिफ्ट किए जाने की उम्मीद है।
– रामदेव मीणा, प्राचार्य, राजकीय इटावा कॉलेज
शाहबाद में बस स्टैंड के पास कॉलेज का नया भवन बन रहा है। वर्ष 2022 में काम पूरा होना था लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ। हालांकि, वर्तमान में 50 प्रतिशत ही काम हो सका है। ऐसे में वर्ष 2024 के अंत तक नया कॉलेज भवन तैयार होने की संभावना है।
– संजय कुमार लक्की, प्राचार्य, राज. शाहबाद कॉलेज
जो कॉलेज वर्तमान में अस्थाई भवन में चल रहे हैं, उनके नए भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। ऐसे में नए सेशन तक इन सभी महाविद्यालय अपने नए भवन में शिफ्ट होने की संभावना है। सरकार क्वालिटी एजुकेशन के साथ सुविधाएं विकसित करने पर जोर दे रही है। विद्यार्थियों के भविष्य के लिए सरकार का यह कदम सराहनीय है।
– डॉ. रघुराज सिंह परिहार, क्षेत्रिय निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय कोटा