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परीक्षा से पहले ही बंद कर दी फर्स्ट सेमेस्टर की कक्षाएं
कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित राजकीय महाविद्यालयों में परीक्षा से पहले ही बीए प्रथम वर्ष की कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। जबकि, सेमेस्टर परीक्षाएं सिर पर हैं और 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। इसके बावजूद कक्षाएं संचालित नहीं करवाई जा रही है। विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। दरअसल, राजसेस कॉलेजों में बीए फर्स्ट इयर के प्रथम सेमेस्टर में कॉलेज प्रशासन द्वारा 90 दिन ही कक्षाएं संचालित किए जाने के नियमों का हवाला देकर शिक्षकों को कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में विद्या संबल शिक्षकों द्वारा कक्षाएं ... Read more
प्राइवेट कॉलेजों के साथ एमओयू कर सरकार देगी क्वालिटी एजुकेशन, निखारेगी प्रतिभाएं
कोटा। राइजिंग राजस्थान के तहत सरकारी कॉलेजों के सूरतेहाल बदलने की तैयारी है। सरकार ने बड़ी पहल करते हुए प्राइवेट कॉलेजों के साथ एमओयू करने जा रही है। जिसका फायदा सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को साधन-संसाधनों की उपलब्धता के रूप में मिल सकेगा। वहीं, क्वालिटी एजुकेशन, रिसर्च वर्क, स्किल डवलपमेंट, पसर्नालटी डवलपमेंट को निखारने के संयुक्त प्रयास हो सकेंगे। शिक्षाविदें का मानना है, सरकार के इस प्रयास से संसाधनों व रिसोर्सेज से जूझते सरकारी महाविद्यालय को संजीवनी मिल सकती है, साथ ही छात्र-शिक्षकों के बीच मैं की जगह हम की भवना विकसित होगी। संभाग को मिले 44 ... Read more
6 माह की परीक्षा 2 माह में, सिलेबस पूरा होना तो दूर, पास होना ही चुनौती
कोटा। हाड़ौती में खुले 4 नए कॉलेजों के विद्यार्थियों का भविष्य अधरझूल में है। दिसम्बर में बीए फर्स्ट ईयर के प्रथम सेमेस्टर एग्जाम होने हैं लेकिन अभी तक कई कॉलेजों में कक्षाएं ही प्रारंभ नहीं हुई है। ऐसे में आगामी 2 माह में सिलेबस पूरा होना तो दूर विद्यार्थियों का पास होना ही चुनौतिपूर्ण है। दरअसल, मुख्यमंत्री बजट घोषणा में सत्र 2024-25 में सरकार ने कोटा, बूंदी व झालावाड़ में कुल 4 नए राजकीय कला महाविद्यालय खोले हैं। इनमें प्रवेश प्रक्रिया ही 30 सितम्बर तक जारी रही है। वहीं, कागजों में एक अक्टूबर से कक्षाएं प्रारंभ कर दी गई लेकिन ... Read more
कहीं धर्मशाला तो कहीं स्कूलों में चल रहे सरकारी कॉलेज
कोटा। हाड़ौती के सरकारी महाविद्यालय धर्मशाला व स्कूलों में चल रहे हैं, जहां सुविधाएं तो न के बराबर हैं लेकिन हादसों का खतरा भरपूर है। इन कॉलेजों को आज तक खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। कस्बों के सरकारी स्कूलों में उधार के कमरों में यह कॉलेज चल रहे हैं। हालात यह हैं, कहीं 2 तो कहीं 4 कमरों में कॉलेज संचालित करना पड़ रहा है। जबकि, अधिकतर महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 600 से ज्यादा है। वहीं, नए खुले कॉलेजों में भी 180 विद्यार्थियों का नामांकन है। ऐसे में विद्यार्थियों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती। हाल ही ... Read more