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कहने को लाडो, असल में ‘लडडू’ ही गोपाल
कोटा। कहने को लाड़ो, असल में लडडू ही गोपाल…, यह मुहावरा नहीं बल्कि समाज के दोहरे चरित्र का आईना है। बेटियों को बराबरी का हक होने का एहसास तो कराया जाता है लेकिन जब साबित करने की बारी आती है तो समानता का आईना दोगलेपन की दरार से तड़क जाता है। आधुनिक युग में आज भी बेटों और बेटियों की शिक्षा में भेद किया जा रहा है। जिसकी गवाही सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का रिकॉर्ड खुद बयां कर रहा है। नवज्योति ने कोटा जिले के करीब 2 हजार सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के पिछले चार सालों ... Read more