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आखिर विदेशी सैलानियों को क्यों नहीं आकर्षित कर पा रही कोटा नगरी

कोटा। कोटा शहर आज पर्यटन की दृष्टि से बहुत समृद्ध हैं। विदेशी पर्यटकों के आकर्षण के लिए कोटा शहर में वह सब कुछ है जो पूरे प्रदेश में कहीं नहीं हैं। लेकिन उसके बाद भी कोटा को देश विदेश में पर्यटन के मानचित्र पर उभारने के प्रयासों के लिए जो प्रयास किए जाने चाहिए वैसे अब तक नहीं किए गए। यहीं कारण है कि विदेशी पर्यटक कोटा के समीप बूंदी देखने तो आते हैं किन्तु कोटा नहीं आते। कुछ विदेशी पर्यटक अगर कोटा आते हैं तो वह निजी ट्रैवल कंपनियों व टूर ऑपरेटर्स की मेहनत का नतीजा है। कोटा में ... Read more

Dehradun: ये है 42 साल पुरानी बेकरी, यहां के घी पिन्नी बिस्किट और रसमलाई केक के लोग हैं दीवाने

देहरादून. उत्तराखंड की राजधानीदेहरादून में वैसे तो कई बेकरी शॉप हैं लेकिन साल 1980 की एक ऐसी बेकरी कि हम आपको बात बताने जा रहे हैं, जो कई तरह की मिठाइयां तो परोस ही रही है लेकिन यहां सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं रसमलाई केक और घी पिन्नी बिस्किट. अगर आप भी मीठा खाना पसंद करते हैं, तो आप देहरादून के चकराता रोड स्थित वीनस बेकर्स एंड स्वीट कॉर्नर पर जरूर आएं और यहां की मशहूर मिठाइयों और बेकरी उत्पादों का आनंद लें. बेकरी के मालिक राहुल गुप्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि साल 1980 में उनके पिता राजेश ... Read more

Karnaprayag History: कर्णप्रयाग खूबसूरत होने के साथ है बेहद खास, महाभारत के कर्ण से जुड़ा है नाता!

रिपोर्ट: सोनिया मिश्रा कर्णप्रयाग. उत्तराखंड के पांच प्रयागों में से एक अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर कर्णप्रयाग (Karnaprayag History) नगर बसा है. आसपास के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने का यह एक कस्बा है, जहां दूरदराज के गांवों से जुड़े लोग तमाम छोटी बड़ी जरूरत के सामान को लेने पहुंचते हैं. माना जाता है कि महाभारत के पात्र दानवीर कर्ण के नाम पर ही इस नगर का नाम कर्णप्रयाग पड़ा है. उत्तराखंड के चमोली जिले में कर्णप्रयाग शहर अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर बसा है, जो धार्मिक, पर्यटन, राजनैतिक ऐतिहासिक दृष्टि से अपना बेहद महत्वपूर्ण स्थान ... Read more